Sunday, May 10, 2026

वट सावित्री व्रत 2026: वट सावित्री व्रत कब है? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

by Neha
वट सावित्री व्रत 2026: वट सावित्री व्रत कब है? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

वट सावित्री व्रत 2026 कब है? जानिए 16 मई और 29 जून की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व।

वट सावित्री व्रत 2026: वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु के लिए किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या और पूर्णिमा—दोनों तिथियों पर मनाया जाता है।

इस वर्ष वट सावित्री अमावस्या 16 मई 2026 को और वट सावित्री पूर्णिमा 29 जून 2026 को मनाई जाएगी।

वट सावित्री व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त

ज्येष्ठ अमावस्या (16 मई 2026):

  • तिथि प्रारंभ: सुबह 5:11 बजे
  • तिथि समाप्त: 17 मई 2026 सुबह 1:30 बजे
  • पूजा मुहूर्त: सुबह 7:12 से 8:24 बजे तक

ज्येष्ठ पूर्णिमा (29 जून 2026):

  • तिथि प्रारंभ: सुबह 3:06 बजे
  • तिथि समाप्त: 30 जून 2026 सुबह 5:26 बजे
  • पूजा मुहूर्त: सुबह 8:55 से 10:40 बजे तक

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वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि वट सावित्री व्रत करने से स्त्री को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और पति की आयु लंबी होती है। यह व्रत नारी शक्ति, त्याग और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है।

व्रत से जुड़ी पौराणिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो स्त्री श्रद्धा और भक्ति से यह व्रत करती है, वह सभी पापों से मुक्त होकर सुखी वैवाहिक जीवन और सौभाग्य प्राप्त करती है। मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति का भी उल्लेख शास्त्रों में मिलता है।

वट सावित्री व्रत की पूजा विधि

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • वट वृक्ष के नीचे पूजा सामग्री रखें
  • रोली, चावल, फूल, धूप और दीप से पूजा करें
  • वट वृक्ष की 7 या 108 परिक्रमा करें
  • कच्चा सूत (मौली) वृक्ष पर बांधें
  • सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें और पति की दीर्घायु की कामना करें

वट वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है?

वट वृक्ष को दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसके विभिन्न हिस्सों में त्रिदेवों का वास माना जाता है—

  • जड़ों में ब्रह्मा
  • तने में विष्णु
  • शाखाओं में शिव

इसी कारण वट वृक्ष की पूजा को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

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