Sleep Apnea Risk: स्लीप एपनिया एक ऐसी गंभीर नींद से जुड़ी समस्या है, जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुक जाती है क्योंकि एयरवे (श्वसन मार्ग) ब्लॉक हो जाता है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और नींद बार-बार टूटती रहती है।
नई रिसर्च में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
हाल ही में यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी 2026 में प्रस्तुत एक अध्ययन में यह पाया गया कि स्लीप एपनिया से पीड़ित लोगों में दिल की बीमारियों और मौत का खतरा लगभग 71 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। यह रिसर्च लंदन स्थित Imperial College London के वैज्ञानिकों द्वारा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में हेल्थ रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया।
नींद की क्वालिटी और शरीर पर असर
स्लीप एपनिया के दौरान रात में कई बार सांस रुकने और दोबारा शुरू होने की प्रक्रिया होती रहती है, जिससे नींद गहरी नहीं हो पाती। इसके कारण शरीर में ऑक्सीजन स्तर गिरता है और लंबे समय में ब्लड प्रेशर, हार्ट रिदम और सूजन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसी वजह से इस स्थिति को दिल की बीमारियों और स्ट्रोक से भी जोड़ा जाता है।
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मोटापे से गहरा संबंध
विशेषज्ञों के अनुसार, स्लीप एपनिया का मोटापे से गहरा संबंध है। लगभग 40 से 70 प्रतिशत मरीज ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त पाए जाते हैं। गर्दन के आसपास फैट जमा होने से एयरवे संकरा हो जाता है, जिससे सांस लेने में बाधा आती है।
स्टडी में क्या मिला?
इस अध्ययन में करीब 29 लाख लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। इनमें 20,000 से अधिक स्लीप एपनिया मरीजों की तुलना बिना इस समस्या वाले लोगों से की गई।
चार साल के फॉलो-अप में पाया गया कि स्लीप एपनिया वाले लगभग 26 प्रतिशत लोगों को हार्ट अटैक, स्ट्रोक या मृत्यु जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा, जबकि दूसरे समूह में यह आंकड़ा करीब 17 प्रतिशत था।
अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा
स्लीप एपनिया से ग्रस्त लोगों में डायबिटीज, मोटापा, जोड़ों की समस्याएं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां भी अधिक देखी गईं। इसके अलावा ऐसे मरीजों को बार-बार चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ती है।
इलाज और सावधानी जरूरी
इस बीमारी का इलाज संभव है, जिसमें CPAP मशीन सबसे आम उपाय है। यह मशीन सोते समय एयरवे को खुला रखने में मदद करती है। हालांकि कई लोग इस समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।