प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर विवाद तेज, संजय सिंह ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर विवाद तेज, संजय सिंह ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर विवाद तेज हो गया है। आप सांसद संजय सिंह ने सरकार पर महंगाई और ईंधन बचत को लेकर आम जनता पर बोझ डालने का आरोप लगाया, जिससे राजनीतिक बहस और गरमा गई है।

देश में बढ़ती महंगाई और वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपीलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया है।

संजय सिंह का सरकार पर निशाना

संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव के दौरान सरकार जनता के हितों और राहत की बात करती है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही आम लोगों को महंगाई और बढ़ती कीमतों के बीच छोड़ दिया जाता है।

उन्होंने दावा किया कि देश में पहले ही गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हो चुकी है और आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में जनता से ईंधन और संसाधनों की खपत कम करने की अपील करना व्यावहारिक नहीं है।

सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप

आप नेता ने केंद्र सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक ओर लोगों से बचत, त्याग और कम संसाधन उपयोग करने की अपील की जाती है, वहीं दूसरी ओर बड़े राजनीतिक आयोजनों, रैलियों और विदेशी दौरों में भारी मात्रा में ईंधन खर्च किया जाता है। संजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार से सवाल पूछने वालों को अक्सर देशभक्ति के नाम पर चुप कराने की कोशिश की जाती है।

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पीएम मोदी की अपील क्या थी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सिकंदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान लोगों से अपील की थी कि वे खाने के तेल का सीमित उपयोग करें, सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करें और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं। उन्होंने इसे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच “आर्थिक आत्मरक्षा” का हिस्सा बताया था और नागरिकों से संसाधनों की समझदारी से खपत करने की अपील की थी।

राजनीतिक विवाद जारी

प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां सरकार इसे जिम्मेदार उपभोग और आर्थिक स्थिरता की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे आम जनता पर बढ़ते आर्थिक दबाव के रूप में देख रहा है।

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