थायरॉइड असंतुलन के कारण गर्दन, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द क्यों होता है और इसे कैसे कम करें, जानें लक्षण, कारण और उपचार।
थायरॉइड शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्मोन और कई जरूरी कार्यों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। बहुत से लोग जानते हैं कि थायरॉइड की समस्या वजन, मूड या थकान को प्रभावित कर सकती है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि थायरॉइड असंतुलन मांसपेशियों, जोड़ों और गर्दन में दर्द का कारण भी बन सकता है।
जब शरीर में हार्मोन का स्तर असंतुलित होता है, तो सूजन, अकड़न और दर्द जैसी समस्याएं धीरे-धीरे सामने आने लगती हैं। हाइपरथायरॉइडिज्म और हाइपोथायरॉइडिज्म दोनों ही मांसपेशियों और जोड़ों में असुविधा पैदा कर सकते हैं।
गर्दन में दर्द और थायरॉइड
थायरॉइड में सूजन या गॉइटर जैसी स्थिति होने पर गर्दन में कोमलता और दर्द महसूस हो सकता है। कभी-कभी यह दर्द जबड़े या कान तक भी फैल सकता है।
मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी
थायरॉइड हार्मोन का स्तर कम होने पर मांसपेशियां कमजोर, अकड़ी और दर्दभरी लग सकती हैं, खासकर कंधों में। वहीं, हाइपरथायरॉइडिज्म में ऊपरी बाजुओं और पैरों में क्रैम्प या थकान महसूस हो सकती है।
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जोड़ों में दर्द और अकड़न
थायरॉइड असंतुलन के कारण जोड़ों में भी अकड़न और सूजन हो सकती है। हाइपोथायरॉइडिज्म में यह दर्द गठिया जैसे लक्षण पैदा कर सकता है, जिसमें जोड़ों में जकड़न और कोमलता महसूस होती है। अक्सर इसे अन्य बीमारियों के रूप में समझा जाता है, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।
अन्य प्रभावित हिस्से
कभी-कभी दर्द पीठ, कंधों या सीने में भी दिखाई देता है। हालांकि सीने में दर्द हमेशा गंभीर संकेत हो सकता है और डॉक्टर से जांच जरूरी है, लेकिन यदि इसके साथ थायरॉइड के अन्य लक्षण भी हों, तो यह ग्रंथि से जुड़ा संकेत हो सकता है।
निगरानी और निदान
अगर आपको लगता है कि दर्द थायरॉइड से जुड़ा हो सकता है, तो अपने लक्षणों का रिकॉर्ड रखें—कब और कहां दर्द होता है, किन परिस्थितियों में बढ़ता या घटता है। वजन, मूड, भूख और गर्दन की सूजन जैसे लक्षणों पर भी ध्यान दें। खून की जांच (TSH, T3, T4) से थायरॉइड की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।
थायरॉइड से जुड़े दर्द का प्रबंधन
थायरॉइड से जुड़े दर्द को केवल दवा से नहीं, बल्कि सही जीवनशैली, फिजिकल थेरेपी और दर्द प्रबंधन तकनीकों के जरिए भी कम किया जा सकता है। समय रहते इसका इलाज करने से न सिर्फ दर्द में राहत मिलती है, बल्कि गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता भी बनी रहती है।