Friday, July 24, 2026

World Autism Awareness Day: क्या है ऑटिज्म, जानिए इससे जुड़े आम भ्रांतियां

by editor
World Autism Awareness Day: क्या है ऑटिज्म, जानिए इससे जुड़े आम भ्रांतियां

ऑटिज्म को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 2 अप्रैल को World Autism Awareness Day मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस विकार के कारणों और इससे जुड़ी आम भ्रांतियों के बारे में।

World Autism Awareness Day : ऑटिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति सामाजिक मेलजोल में असहज महसूस करता है। यह आमतौर पर बचपन में ही विकसित हो जाती है और इससे बच्चों का मानसिक विकास धीमा हो सकता है। ऑटिज्म से ग्रसित बच्चे सामान्य बच्चों से अलग होते हैं—उनकी सोचने-समझने की क्षमता और कार्य करने का तरीका अलग होता है। कुछ लोग इसे एक मानसिक विकार मानते हैं और सोचते हैं कि इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन यह सच नहीं है। सही थेरेपी और देखभाल से इसे प्रबंधित किया जा सकता है। हालांकि, इस विकार को लेकर कई भ्रांतियां भी प्रचलित हैं।

यह धारणा गलत है कि ऑटिज्म की थेरेपी केवल बच्चों के लिए होती है। वास्तव में, ये थेरेपी वयस्कों के लिए भी प्रभावी हो सकती हैं। कई मामलों में, ऑटिज्म से ग्रसित वयस्कों को भी थेरेपी से लाभ मिला है। किसी भी उम्र में यह समस्या महसूस होने पर थेरेपी का सहारा लिया जा सकता है।

ऑटिज्म के इलाज में दवाओं के साथ-साथ बिहेवियरल थेरेपी और लैंग्वेज थेरेपी जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। यदि लक्षण हल्के भी हों, तो भी थेरेपी से लाभ मिल सकता है। खासकर शुरुआती चरण में इलाज कराने से ऑटिज्म के लक्षणों को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

ऑटिज्म थेरेपी कैसे मदद करती है?

  • बिहेवियरल थेरेपी: यह व्यक्ति के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करती है, जिससे वह सामाजिक रूप से अधिक सक्रिय हो सकता है।

  • लैंग्वेज थेरेपी: इसमें भाषा कौशल पर काम किया जाता है, क्योंकि ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को अक्सर शब्दों का सही उच्चारण करने में कठिनाई होती है।

डॉक्टर इन थेरेपी की मदद से ऑटिज्म के लक्षणों को नियंत्रित करने और व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।

ऑटिज्म क्या है?

ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल विकार है, जो जन्म से ही मौजूद रहता है और जीवन भर बना रह सकता है। इसे पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन थेरेपी और सही देखभाल से लक्षणों को प्रबंधित किया जा सकता है। यह स्थिति मस्तिष्क के विकास और कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है, जिसके कारण व्यक्ति का व्यवहार आम लोगों से अलग हो सकता है और उसे सामाजिक परिस्थितियों में घुलने-मिलने में कठिनाई महसूस हो सकती है।

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