Unnecessary Blood Tests: क्या आप भी बार-बार ब्लड टेस्ट करवाते हैं? जानें अनावश्यक मेडिकल जांच के नुकसान, कौन से टेस्ट बार-बार नहीं कराने चाहिए और स्वस्थ व्यक्ति को कितनी बार जांच करवानी चाहिए।
Unnecessary Blood Tests: आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं। छोटी-सी परेशानी होने पर भी कई लोग तुरंत ब्लड टेस्ट करवाने लगते हैं। थकान महसूस होने पर विटामिन टेस्ट, वजन बढ़ने पर थायरॉयड जांच और फिटनेस के लिए कई तरह के हेल्थ पैकेज लेना आम हो गया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार ब्लड टेस्ट कराना जरूरी नहीं होता और जरूरत से ज्यादा जांच कई बार नुकसानदायक साबित हो सकती है।
कई बार रिपोर्ट में किसी एक वैल्यू का सामान्य सीमा से थोड़ा ऊपर या नीचे आना लोगों को चिंतित कर देता है। लेकिन हर छोटा बदलाव किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। ऐसे में बिना जरूरत अतिरिक्त जांच करवाने से मानसिक तनाव, खर्च और अनावश्यक इलाज की स्थिति पैदा हो सकती है।
बिना वजह बार-बार ब्लड टेस्ट से बचने की सलाह
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद के इंटरनल मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. संतोष कुमार अग्रवाल के अनुसार, ब्लड टेस्ट हमेशा व्यक्ति के लक्षण, स्वास्थ्य इतिहास और बीमारी के जोखिम को ध्यान में रखकर ही कराया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि केवल इसलिए बार-बार जांच करवाना उचित नहीं है क्योंकि टेस्ट आसानी से उपलब्ध हैं। किसी भी जांच की जरूरत डॉक्टर की सलाह और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर तय होनी चाहिए।
कौन-कौन से ब्लड टेस्ट लोग बार-बार करवाते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ ऐसी जांचें हैं जिन्हें लोग बिना आवश्यकता बार-बार दोहराते रहते हैं। इनमें शामिल हैं:
- विटामिन D टेस्ट
- विटामिन B12 टेस्ट
- थायरॉयड फंक्शन टेस्ट
- HbA1c टेस्ट
- कोलेस्ट्रॉल टेस्ट
- कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC)
अगर व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी नहीं है, कोई नया लक्षण नहीं है और इलाज में बदलाव की जरूरत नहीं है, तो इन जांचों को बार-बार कराने से अतिरिक्त फायदा नहीं मिलता।
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ज्यादा ब्लड टेस्ट कराने से हो सकते हैं ये नुकसान
अनावश्यक ब्लड टेस्ट केवल पैसे खर्च करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके कई अन्य प्रभाव भी हो सकते हैं। रिपोर्ट में मामूली बदलाव देखकर लोग तनाव में आ सकते हैं। कई बार गलत तरीके से असामान्य रिपोर्ट यानी फॉल्स पॉजिटिव परिणाम सामने आ सकते हैं, जिसके बाद अतिरिक्त जांच और ऐसे इलाज शुरू हो सकते हैं जिनकी वास्तव में जरूरत नहीं होती।
इसके अलावा बार-बार खून लेने से:
- नसों में दर्द या जलन हो सकती है
- सूजन या नील पड़ने की समस्या हो सकती है
- बार-बार खून निकलने से कुछ लोगों में एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है
इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ब्लड टेस्ट केवल स्पष्ट चिकित्सीय कारण होने पर ही कराया जाना चाहिए।
स्वस्थ व्यक्ति को कितनी बार करवाना चाहिए ब्लड टेस्ट?
डॉ. संतोष कुमार अग्रवाल के अनुसार, अगर कोई वयस्क पूरी तरह स्वस्थ है और उसमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं हैं, तो सामान्य तौर पर हर 1 से 3 साल में नियमित स्वास्थ्य जांच पर्याप्त हो सकती है।
हालांकि जांच की अवधि व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक बीमारी के इतिहास और स्वास्थ्य जोखिमों पर निर्भर करती है।
रूटीन हेल्थ चेकअप में डॉक्टर की सलाह के अनुसार सामान्य रूप से ये जांचें शामिल हो सकती हैं:
- कम्प्लीट ब्लड काउंट
- ब्लड शुगर टेस्ट
- लिपिड प्रोफाइल
- किडनी फंक्शन टेस्ट
- लिवर फंक्शन टेस्ट
- थायरॉयड टेस्ट
इसके साथ ब्लड प्रेशर, वजन और जीवनशैली की निगरानी भी स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
सही समय पर सही जांच है बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी
विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी सेहत का मतलब ज्यादा से ज्यादा मेडिकल टेस्ट करवाना नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार सही जांच करवाना है।
अगर शरीर में कोई नया लक्षण दिखाई दे, पहले से कोई बीमारी हो या डॉक्टर जांच की सलाह दें, तभी ब्लड टेस्ट करवाना सबसे बेहतर विकल्प है। स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह का पालन करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।