Wednesday, July 29, 2026

Hepatitis B Treatment: क्या हेपेटाइटिस बी का इलाज अब होगा आसान? नई दवा ने जगाई उम्मीद

by Neha
Hepatitis B Treatment: क्या हेपेटाइटिस बी का इलाज अब होगा आसान? नई दवा ने जगाई उम्मीद

Hepatitis B Treatment: नई प्रायोगिक दवा Bepirovirsen के क्लिनिकल ट्रायल में उत्साहजनक नतीजे मिले। जानें क्या यह हेपेटाइटिस बी के इलाज में नई उम्मीद बन सकती है।

Hepatitis B Treatment: हेपेटाइटिस बी के उपचार को लेकर लंबे समय बाद एक महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। Bepirovirsen नामक एक नई प्रायोगिक दवा ने वैश्विक स्तर पर हुए फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में उत्साहजनक परिणाम दिए हैं। शुरुआती निष्कर्ष बताते हैं कि भविष्य में कुछ मरीजों को लंबे समय तक या जीवनभर दवा लेने की आवश्यकता कम हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस दवा के व्यापक उपयोग से पहले कई चरणों की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

भारत में सबसे बड़ी चुनौती अब भी पहचान और इलाज

विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर लिवर विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में अनुमानित 3.5 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी संक्रमण के साथ जीवन जी रहे हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों की जांच नहीं हो पाती और इलाज तक पहुंचने वाले मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत बहुत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में सबसे बड़ी जरूरत संक्रमित लोगों की समय पर पहचान, स्क्रीनिंग और उपचार तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना है।

29 देशों में हुआ फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल

हाल ही में प्रकाशित फेज-3 अध्ययन में 29 देशों के 1,834 मरीजों को शामिल किया गया। ट्रायल में कुछ मरीजों को सामान्य एंटीवायरल दवाओं के साथ Bepirovirsen दी गई।

अध्ययन के अनुसार, इस समूह के लगभग 19 प्रतिशत मरीजों में इलाज बंद करने के छह महीने बाद भी वायरस का पता नहीं चला। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को “फंक्शनल क्योर” कहा जाता है। वहीं, प्लेसीबो समूह में ऐसा परिणाम देखने को नहीं मिला।

करीब दो दशक बाद बड़ी उपलब्धि

विशेषज्ञों का कहना है कि हेपेटाइटिस बी के उपचार के क्षेत्र में यह पिछले लगभग 20 वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में इस दिशा में और नई दवाओं के विकसित होने की संभावना है। हालांकि किसी भी नई दवा के नियमित इस्तेमाल से पहले उसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता और नियामक संस्थाओं की मंजूरी जरूरी होती है।

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मौजूदा इलाज से कैसे अलग है Bepirovirsen?

वर्तमान में इस्तेमाल होने वाली एंटीवायरल दवाएं वायरस को पूरी तरह समाप्त नहीं करतीं, बल्कि उसकी सक्रियता को नियंत्रित करती हैं। इसी कारण अधिकांश मरीजों को लंबे समय तक दवा लेनी पड़ती है।

इसके विपरीत, Bepirovirsen वायरस के शुरुआती जीवन चक्र को प्रभावित करने का प्रयास करती है। इससे वायरस की मात्रा कम होने के साथ-साथ उन प्रोटीनों का निर्माण भी घट सकता है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हैं।

‘फंक्शनल क्योर’ क्यों माना जा रहा है अहम?

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मरीज फंक्शनल क्योर तक पहुंचता है, तो भविष्य में लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम हो सकता है। साथ ही संक्रमण के दूसरे लोगों तक फैलने की संभावना भी घट सकती है।

हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होगी नई दवा

डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल यह दवा सभी मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जा सकती। शुरुआती आकलन के अनुसार, इसका अधिक लाभ उन लोगों को मिल सकता है जिनका संक्रमण पहले से एंटीवायरल दवाओं के जरिए नियंत्रित है और जिनके शरीर में वायरस की मात्रा कम है।

टीकाकरण अब भी सबसे प्रभावी बचाव

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि नई दवा को रोकथाम का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय बना हुआ है।

डॉक्टरों की सलाह है कि नवजात शिशुओं का टीकाकरण जरूर कराया जाए। साथ ही संक्रमित मरीजों के परिवार के सदस्य, स्वास्थ्यकर्मी, डायलिसिस कराने वाले मरीज और अन्य उच्च जोखिम वाले लोग अपनी जांच कराएं और यह सुनिश्चित करें कि उन्हें हेपेटाइटिस बी का टीका लग चुका है।

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