Thursday, July 30, 2026

Papaya Leaf Extract Cancer: क्या पपीते की पत्तियों से कैंसर का इलाज संभव है? नई रिसर्च के दावे पर मेडिकल जगत में बहस तेज

by Neha
Papaya Leaf Extract Cancer: क्या पपीते की पत्तियों से कैंसर का इलाज संभव है? नई रिसर्च के दावे पर मेडिकल जगत में बहस तेज

Papaya Leaf Extract Cancer: क्या पपीते की पत्तियां कैंसर का इलाज कर सकती हैं? नई रिसर्च में प्लेटलेट्स रिकवरी के दावे के बाद मेडिकल जगत में बहस शुरू हो गई है। जानें पूरी जानकारी।

Papaya Leaf Extract Cancer: कैंसर इलाज को लेकर एक नई रिसर्च ने मेडिकल क्षेत्र में चर्चा बढ़ा दी है। इस अध्ययन में दावा किया गया है कि पपीते की पत्तियों से तैयार किया गया अर्क (Carica Papaya Leaf Extract) कीमोथेरेपी ले रहे कैंसर मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि, इस रिसर्च को लेकर अब वैज्ञानिक समुदाय में सवाल भी उठाए जा रहे हैं।

टाटा मेमोरियल सेंटर द्वारा की गई क्लीनिकल ट्रायल में सामने आए निष्कर्षों के अनुसार, पपीते की पत्तियों के अर्क का इस्तेमाल कीमोथेरेपी के दौरान प्लेटलेट्स की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए सहायक साबित हो सकता है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी ग्लोबल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित हुआ था।

हालांकि बाद में केरल के हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. साइरिएक एबी फिलिप्स की शिकायत के बाद जर्नल ने इस रिसर्च पर “एक्सप्रेशन ऑफ कंसर्न” जारी किया। इसका अर्थ यह नहीं है कि अध्ययन को गलत घोषित कर दिया गया है, बल्कि जर्नल द्वारा उठाए गए सवालों की समीक्षा की जा रही है।

रिसर्च में क्या सामने आया?

इस क्लीनिकल ट्रायल में लगभग 200 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था, जिनमें कीमोथेरेपी के दौरान प्लेटलेट्स का स्तर काफी कम हो गया था।

रिसर्च के मुताबिक, जिन मरीजों को Carica Papaya Leaf Extract (CPLE) दिया गया, उनमें प्लेसीबो ग्रुप की तुलना में प्लेटलेट्स तेजी से बढ़े। अध्ययन में बताया गया कि चौथे दिन से ही प्लेटलेट्स रिकवरी में अंतर देखने को मिला।

रिसर्च में यह भी दावा किया गया कि CPLE लेने वाले मरीजों में कीमोथेरेपी को टालने या दवा की मात्रा कम करने की जरूरत कम पड़ी।

अध्ययन के अनुसार:

  • CPLE लेने वाले करीब 25 प्रतिशत मरीजों में इलाज में बदलाव की जरूरत पड़ी।
  • प्लेसीबो ग्रुप में यह आंकड़ा लगभग 43 प्रतिशत रहा।
  • ट्रायल के दौरान किसी गंभीर साइड इफेक्ट की जानकारी नहीं मिली।

रिसर्च टीम के अनुसार, यह सपोर्टिव ट्रीटमेंट लगभग 10 दिनों का था और इसकी लागत करीब 300 रुपये बताई गई।

also read: Unnecessary Blood Tests: बार-बार ब्लड टेस्ट कराना पड़…

रिसर्च की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

इस अध्ययन को लेकर डॉ. साइरिएक एबी फिलिप्स ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर रिसर्च की प्रक्रिया और आंकड़ों को लेकर चिंता जताई।

वहीं टाटा मेमोरियल सेंटर के वैज्ञानिकों का कहना है कि जर्नल द्वारा जारी किया गया एक्सप्रेशन ऑफ कंसर्न केवल जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे वैज्ञानिक धोखाधड़ी या रिसर्च में गलती का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

स्टडी के सह-लेखक और वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कुमार प्रभाष ने कहा कि यह शोध वैज्ञानिक प्रक्रिया और इंटरनेशनल पीयर रिव्यू के बाद प्रकाशित हुआ है। उन्होंने बताया कि इस रिसर्च को 2025 में अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी की वार्षिक बैठक में भी प्रस्तुत किया गया था।

क्या पपीते की पत्तियां कैंसर का इलाज कर सकती हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा रिसर्च के आधार पर यह दावा करना सही नहीं होगा कि पपीते की पत्तियां कैंसर को ठीक कर सकती हैं।

रिसर्च में केवल यह संकेत मिला है कि पपीते की पत्तियों का अर्क कीमोथेरेपी के दौरान प्लेटलेट्स रिकवरी में सहायक भूमिका निभा सकता है। इसे कैंसर का इलाज या मुख्य चिकित्सा विकल्प नहीं माना जा सकता।

प्रमुख शोधकर्ता डॉ. विकास ओस्टवाल ने कहा कि उनकी टीम अपने निष्कर्षों पर कायम है और यदि वैज्ञानिक स्तर पर कोई सवाल उठता है तो उसका जवाब उचित प्रक्रिया के तहत दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मेडिकल रिसर्च का मूल्यांकन सोशल मीडिया की बहस से नहीं बल्कि वैज्ञानिक जांच, प्रमाण और आगे के अध्ययनों के आधार पर किया जाना चाहिए।

You may also like

‘मैंने कभी हाथ नहीं उठाया’ घरेलू हिंसा के आरोपों पर श्वेता तिवारी के एक्स पति ने तोड़ी चुप्पी जब भरोसेमंद रिश्ते ने दिया दर्द, शिवांगी जोशी ने बताया बचपन का सबसे दर्दनाक सच ‘पिता की मौत में की मदद’… मां-बहन ने तोड़ा रिश्ता, राम कपूर ने खोला 5 साल पुराना राज वायरल हुआ अनुराग का वीडियो, पत्नी पर लगाए एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के आरोप ‘मेरा कुत्ता आ जाता…’ पति से मुलाकात के बाद आकांक्षा चमोला के बयान पर मचा बवाल