Saturday, September 5, 2026

गणेश चतुर्थी 2026: 14 सितंबर से शुरू होगा 10 दिन का गणेश उत्सव, जानें पूजा मुहूर्त और स्थापना विधि

by Neha
गणेश चतुर्थी 2026: 14 सितंबर से शुरू होगा 10 दिन का गणेश उत्सव, जानें पूजा मुहूर्त और स्थापना विधि

गणेश चतुर्थी 2026: गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी। जानें गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, चंद्र दर्शन का समय और पर्व का महत्व।

गणेश चतुर्थी 2026: भगवान गणेश के भक्तों के लिए गणेश चतुर्थी का पर्व बेहद खास माना जाता है। इसी दिन घरों और पंडालों में गणपति की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद गणेश उत्सव का सिलसिला अनंत चतुर्दशी तक चलता है। साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी।

गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला यह उत्सव करीब 10 दिनों तक चलता है। इस दौरान भक्त भगवान गणेश की आराधना करते हैं और सुख-समृद्धि तथा जीवन से विघ्न दूर होने की कामना करते हैं।

गणेश चतुर्थी 2026 तिथि: कब है गणेश चतुर्थी?

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर 2026 को सुबह 7:06 बजे शुरू होगी। इसका समापन 15 सितंबर 2026 को सुबह 7:44 बजे होगा।

उदयातिथि और पर्व की परंपरा के अनुसार गणेश चतुर्थी का त्योहार 14 सितंबर को मनाया जाएगा। इसी दिन गणपति की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाएगी।

गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए मध्याह्न का समय विशेष माना जाता है। 2026 में गणपति स्थापना और पूजा के लिए दिया गया मुहूर्त इस प्रकार है:

  • गणेश पूजा मुहूर्त: सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक
  • पूजा की अवधि: करीब 2 घंटे 28 मिनट
  • चंद्र दर्शन से बचने का समय: सुबह 9:01 बजे से रात 8:09 बजे तक

मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करने से बचना चाहिए।

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गणेश चतुर्थी पूजा विधि: कैसे करें गणपति स्थापना?

गणेश चतुर्थी के दिन घर में भगवान गणेश की स्थापना करने से पहले पूजा स्थल को साफ करके तैयार करें। इसके बाद स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत या पूजा का संकल्प लें।

पूजा की विधि इस तरह कर सकते हैं:

  • घर की उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा की चौकी स्थापित करें और उस पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाएं।
  • चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा को विधिपूर्वक स्थापित करें।
  • गणपति के दाईं ओर कलश रखें और उसके ऊपर नारियल स्थापित करें। कलश पर मौली बांधें।
  • भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें। साथ ही मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
  • गणेश जी की पूजा के दौरान मंत्रों और गणेश कथा का पाठ करें।
  • पूजा पूरी होने के बाद भगवान गणेश की आरती करें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें।

गणेश उत्सव क्यों है खास?

गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला उत्सव भक्तों के लिए आस्था और भक्ति का पर्व है। घरों के अलावा देश के कई हिस्सों में सार्वजनिक पंडालों में भी गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाती है।

भक्त इन दिनों भगवान गणेश की विशेष पूजा करते हैं और उनसे बुद्धि, सुख, समृद्धि तथा सफलता का आशीर्वाद मांगते हैं। उत्सव के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के साथ समारोह का समापन होता है।

भगवान गणेश की पूजा का धार्मिक महत्व

हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकारी देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य या मांगलिक अनुष्ठान की शुरुआत से पहले गणेश जी का स्मरण और पूजन करने की परंपरा है।

मान्यता के अनुसार गणपति बुद्धि, विवेक और सिद्धि प्रदान करने वाले देव हैं। यही वजह है कि विवाह, गृह प्रवेश, पूजा-पाठ और अन्य शुभ अवसरों पर सबसे पहले भगवान गणेश की आराधना की जाती है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर भक्त श्रद्धा के साथ गणपति की पूजा करते हैं और अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं।

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