सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं, इसलिए पंजाब में उनका वोट क्यों होना चाहिए? जानें वोट विवाद पर AAP का पूरा बयान।
पंजाब में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का वोटर लिस्ट से नाम हटने को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर भाजपा के सवालों का जवाब देते हुए कहा है कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं, ऐसे में उनका वोट पंजाब में क्यों होना चाहिए। आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और भाजपा पर भी कई गंभीर आरोप लगाए।
राघव चड्ढा के वोट पर क्या बोले सौरभ भारद्वाज?
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राघव चड्ढा पंजाब में निवास नहीं करते और दिल्ली में रहते हैं। ऐसे में नियमों के मुताबिक उनका वोट उसी स्थान पर होना चाहिए जहां वह वास्तव में रहते हैं।
उन्होंने दावा किया कि एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान यदि कोई व्यक्ति अपने दर्ज पते पर मौजूद नहीं मिलता है, तो उसके नाम को मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। भारद्वाज के मुताबिक राघव चड्ढा भी अपने दर्ज पते पर नहीं मिले, जिसके बाद उनका नाम हटाया गया।
भाजपा पर भी साधा निशाना
सौरभ भारद्वाज ने इस मामले को लेकर भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी राघव चड्ढा के वोट को लेकर इतना विरोध क्यों कर रही है, जबकि दिल्ली में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा भी सामने आया है।
आप नेता ने आरोप लगाया कि दिल्ली में घर बदलने वाले कई लोगों को भी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान शिफ्टेड माना गया और उनके वोट प्रभावित हुए। उन्होंने सवाल किया कि यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो राघव चड्ढा के मामले में भाजपा को आपत्ति क्यों है।
दिल्ली में वोट कटने का भी उठाया मुद्दा
भारद्वाज ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के चुनाव अधिकारियों के सामने मतदाता सूची से जुड़े मामलों को उठाया है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति वर्षों से किसी मकान में रह रहा हो और बाद में उसी इलाके में दूसरे मकान में शिफ्ट हो जाए, तो पता बदलने के कारण उसके वोट को शिफ्टेड दिखाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
उनका आरोप है कि आम मतदाताओं के मामलों में नियमों को सख्ती से लागू किया जा रहा है, जबकि वीआईपी से जुड़े मामलों में अलग रवैया अपनाया जा रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से लगाए गए इन राजनीतिक आरोपों पर स्वतंत्र रूप से पुष्टि आवश्यक है।
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राघव चड्ढा के दिल्ली में वोट को लेकर क्या दावा?
सौरभ भारद्वाज ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि राघव चड्ढा का दिल्ली में मतदाता पंजीकरण कराने की प्रक्रिया को लेकर भी जानकारी सामने आई थी। उन्होंने कहा कि पत्रकारों द्वारा चुनाव आयोग से सवाल किए जाने के बाद कथित प्रक्रिया को रोक दिया गया।
आप नेता ने इस पूरे घटनाक्रम को चुनावी पारदर्शिता से जोड़ते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों के वोट प्रभावित करने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
‘राघव चड्ढा पंजाब में नहीं रहते तो वोट भी वहीं होना चाहिए’
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यदि राघव चड्ढा पंजाब में नहीं रहते हैं तो उनका पंजाब की मतदाता सूची में नाम होना उचित नहीं है। उनके मुताबिक मतदाता का नाम उस क्षेत्र में होना चाहिए जहां वह वास्तव में निवास करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि राघव चड्ढा पहले ‘राइट टू रिजेक्ट’ और चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखते रहे हैं। भारद्वाज ने इसी संदर्भ में राघव चड्ढा के राज्यसभा पद को लेकर भी सवाल खड़े किए और कहा कि इस विषय पर उनसे नैतिक आधार पर जवाब मांगा जाना चाहिए।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को लेकर भी सवाल
सौरभ भारद्वाज ने मीडिया संस्थान इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े एक कथित घटनाक्रम पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि पत्रकारों के पास राघव चड्ढा के दिल्ली में वोट बनवाने से संबंधित जानकारी थी, लेकिन यह खबर प्रकाशित नहीं हुई।
उन्होंने अखबार के संपादकीय नेतृत्व से सवाल किया कि यदि पत्रकारों के पास ऐसी जानकारी थी तो इसे प्रमुख खबर के तौर पर प्रकाशित क्यों नहीं किया गया। भारद्वाज ने इसे पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों से जोड़ते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ी तकरार
राघव चड्ढा के वोट का मुद्दा अब पंजाब और दिल्ली की राजनीति में नया विवाद बनता दिखाई दे रहा है। आम आदमी पार्टी जहां मतदाता सूची में बदलाव और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है, वहीं विपक्षी दल राघव चड्ढा के पंजाब वोट को लेकर सवाल कर रहे हैं।
फिलहाल इस मामले में लगाए गए कई आरोप राजनीतिक बयानों पर आधारित हैं। मतदाता सूची में नाम हटाने और नए स्थान पर पंजीकरण से जुड़े वास्तविक नियम एवं प्रक्रिया चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होंगे।