एनएचएस ने एन्हर्टु दवा को इंग्लैंड में एचईआर2-लो एडवांस्ड ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित करीब 1,000 महिलाओं के लिए मंजूरी दी है। अध्ययन के अनुसार, इससे औसतन करीब सात महीने और कभी-कभी तीन साल की जिंदगी बढ़ सकती है।
कैंसर सबसे खतरनाक और खतरनाक बीमारियों में से एक है। यह बीमारी हर साल लाखों लोगों को मार डालती है। ब्रेस्ट कैंसर, यानी स्तन कैंसर, महिलाओं में सबसे आम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर विश्व भर में प्रति वर्ष 6.94 लाख लोगों की मौत का कारण बनता है। भारत में इससे हर साल 80 हजार से अधिक महिलाएं मर जाती हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि लोगों में कैंसर के नाम से अधिक भय है। नाम सुनते ही लोगों को मौत की याद आती है। हाल के दशकों में मेडिकल विज्ञान में हुई प्रगति के कारण आज कई प्रभावी दवाएं उपलब्ध हैं जो कैंसर के कई मामलों को ठीक कर सकती हैं और रोगी के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने में भी मदद कर सकती हैं।
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हालिया रिपोर्ट से ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों की उम्मीदें बढ़ जाएंगी। इंग्लैंड में सरकारी स्वास्थ्य सेवा में एक ऐसी दवा को शामिल करने की अनुमति दी गई है, जिसके बारे में मरीजों और कैंसर से जुड़ी संस्थाओं ने लंबे समय से आवाज उठाई थी। शोध में पता चला है कि यह दवा ब्रेस्ट कैंसर के कुछ मरीजों के जीवन को बढ़ाने में भी मदद कर सकती है।
महिलाएं जो गंभीर ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही हैं और कैंसर के शरीर के अन्य भागों में फैलने का खतरा बना रहता है, इस दवा को लाभदायक मानती हैं। आइए इसके बारे में ज्यादा जानें।
ब्रेस्ट कैंसर के लिए कारगर मानी जा रही दवा को मिली मंजूरी
इस दवा से हजारों महिलाओं की उम्मीद जगी है जिन्हें ब्रेस्ट कैंसर है जिसका इलाज फिलहाल पूरी तरह असंभव है। इस दवा से कुछ मरीजों की जिंदगी को तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है।
दवा को मंजूरी मिलने में काफी समय लग गया था, इसलिए इस फैसले पर भी चर्चा हुई है। ब्रिटेन में पहली दवाओं का मूल्यांकन करने वाली संस्था ने दवा की कीमत और उससे मिलने वाले फायदे को देखते हुए इसे पर्याप्त लाभदायक नहीं माना था। उसी निर्णय अब बहुत बदल गया है।
- एन्हर्टु को एचईआर2-लो (HER2-low) ब्रेस्ट कैंसर में प्रयोग किया जाता है। एचईआर2 एक प्रोटीन है जो कुछ कैंसर कोशिकाओं की सतह पर होता है।
- 2023 से स्कॉटलैंड में यह दवा उपलब्ध होगी। इसका इस्तेमाल यूरोप के 26 देशों में भी होता है। लेकिन इंग्लैंड में एनएचएस मरीजों को इसे उपलब्ध कराने का निर्णय अब तक नहीं हुआ है।
ब्रेस्ट कैंसर मरीजों और संस्थाओं ने इस निर्णय को दुखी और खुशी भरा बताया है। - दवा को मंजूरी दिलाने के लिए कई साल तक संघर्ष हुआ। इस दौरान कई महिलाएं दवा मिलने का इंतजार करते हुए देश छोड़ गईं।