कुछ देशों में Corona के केस पिछले एक हफ्ते से बढ़ने लगे थे, और अब भारत में भी संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक कोविड के केस में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके पीछे जेएन.1 वेरिएंट को जिम्मेदार माना जा रहा है। लेकिन क्या यह वाकई कोरोना का नया वेरिएंट है? इस सवाल का जवाब विशेषज्ञों ने दिया है।
साल 2020 में पूरी दुनिया में Corona वायरस फैलना शुरू हुआ और इसका प्रभाव सभी ने देखा। अब तक पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हाल ही में सिंगापुर से लेकर भारत तक कोविड के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं, और कई राज्यों में वायरस तेजी से फैल रहा है। इस बढ़ोतरी का कारण कोविड का जेएन.1 वेरिएंट बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह नया स्ट्रेन है, लेकिन क्या यह सच में नया वेरिएंट है और इससे डरने की जरूरत है?
जेएन.1 वेरिएंट के मामले सामने आ रहे हैं और इसके कारण चर्चा भी हो रही है। हालांकि, यह कोई नया वेरिएंट नहीं है। यह लगभग डेढ़ साल पुराना ओमिक्रॉन का एक सब-वेरिएंट है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना आवश्यक है। खासकर उन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, क्योंकि उन्हें वायरस का खतरा अधिक हो सकता है।
क्या जेएन.1 वेरिएंट के लक्षण अलग हैं?
Corona , जेएन.1 वेरिएंट के लक्षण वही पुराने जैसे हैं — खांसी, जुकाम, सिरदर्द और हल्का बुखार। मरीजों में सांस लेने में कोई खास समस्या नहीं देखी गई है। वे बताते हैं कि कोरोना एक वायरस है जो पूरी तरह खत्म नहीं होता, बल्कि अपने आप को जीवित रखने के लिए लगातार म्यूटेट होता रहता है। इसी वजह से नए-नए वेरिएंट आते रहते हैं, लेकिन जेएन.1 कोई नया वेरिएंट नहीं है, बल्कि पुराना और हल्के लक्षणों वाला ही है। कोरोना केस बढ़ रहे हैं, लेकिन लक्षणों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है।
क्या नई लहर आने का खतरा है?
Corona से पहले जैसी गंभीर स्थिति नहीं है। कुछ केस आते रहेंगे, लेकिन यह किसी बड़े खतरे की बात नहीं है। फिर भी लोग सावधानी बरतें, खासकर भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर विशेष ध्यान रखें।