Sugar Price Today: मिलों में चीनी का भाव 67 रुपये से घटकर 47-55 रुपये प्रति किलो तक आया, लेकिन खुदरा कीमत 62.57 रुपये बनी हुई है। जानें चीनी सस्ती क्यों नहीं मिल रही।
Sugar Price Today: त्योहारी सीजन के बीच चीनी की कीमतों को लेकर आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत की उम्मीद थी। मिल स्तर पर चीनी के दाम में भारी गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसका पूरा फायदा अभी खुदरा बाजार में दिखाई नहीं दे रहा है। मिलों में जिस चीनी की कीमत कुछ समय पहले करीब 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, वह अब लगभग 47 से 55 रुपये प्रति किलो के दायरे में आ गई है।
इसके बावजूद दुकानों पर ग्राहकों को चीनी अपेक्षाकृत ऊंची कीमत पर ही मिल रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में चीनी का औसत खुदरा भाव पिछले सप्ताह के 65.08 रुपये प्रति किलो से घटकर 62.57 रुपये प्रति किलो रह गया है। यानी खुदरा कीमत में गिरावट तो आई है, लेकिन मिल स्तर पर हुई बड़ी कमी की तुलना में यह काफी कम है।
मिलों में चीनी 17 से 20 रुपये तक सस्ती
चीनी की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट एक्स-मिल स्तर पर देखने को मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुछ समय पहले मिल स्तर पर चीनी का भाव करीब 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था। अब यह घटकर करीब 47 से 55 रुपये प्रति किलो के बीच बताया जा रहा है।
इस तरह अलग-अलग बाजारों और क्वालिटी के आधार पर मिल स्तर पर कीमत में 17 से 20 रुपये प्रति किलो तक की कमी देखने को मिल रही है। हालांकि, थोक और खुदरा बाजार तक पहुंचते-पहुंचते इस गिरावट का बड़ा हिस्सा फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
ग्राहकों को सिर्फ 2-3 रुपये की राहत क्यों?
सवाल यह है कि जब मिलों से चीनी काफी सस्ती निकल रही है तो किराना दुकानों पर इसकी कीमत उसी अनुपात में क्यों नहीं घट रही? इसकी एक बड़ी वजह बाजार में मौजूद पुराना स्टॉक बताया जा रहा है। थोक कारोबारियों और खुदरा दुकानदारों ने अगस्त के मध्य में चीनी की खरीद 65 से 67 रुपये प्रति किलो के आसपास के ऊंचे भाव पर की थी।
कई छोटे दुकानदार एक बार में चीनी की कई बोरियां खरीदकर स्टॉक रखते हैं। ऐसे में उनके पास अभी भी महंगे भाव पर खरीदा गया माल मौजूद है। कारोबारी पुराने स्टॉक को लागत से कम कीमत पर बेचने से बच रहे हैं, जिसके कारण खुदरा बाजार में कीमतों में तेज गिरावट नहीं दिख रही है।
सस्ता स्टॉक दुकानों तक पहुंचने में लगेगा समय
मिल स्तर पर कीमत घटने के बाद उसका असर सीधे ग्राहक तक नहीं पहुंचता। चीनी को मिल से थोक बाजार और फिर खुदरा दुकानों तक पहुंचने में समय लगता है।
चीनी उद्योग से जुड़े संगठनों के अनुसार, एक्स-मिल कीमत में कमी का प्रभाव थोक बाजार में अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई देता है, लेकिन खुदरा बाजार तक इसका पूरा असर पहुंचने में करीब 7 से 10 दिन लग सकते हैं।
इसका मतलब है कि यदि मौजूदा कम कीमत पर चीनी की सप्लाई बनी रहती है और पुराने महंगे स्टॉक की मात्रा कम होती है, तो आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
थोक और खुदरा कीमतों के बीच अंतर भी अहम
चीनी की कीमत तय होने में सिर्फ मिल का भाव ही जिम्मेदार नहीं होता। इसके बाद परिवहन, थोक कारोबार, भंडारण और खुदरा मार्जिन जैसे खर्च भी जुड़ते हैं। इसी वजह से एक्स-मिल और खुदरा कीमत के बीच कुछ अंतर स्वाभाविक है।
हालांकि, जब मिल स्तर पर कीमत में बड़ी गिरावट आती है और खुदरा बाजार में उसका सीमित असर दिखाई देता है, तो उपभोक्ताओं के बीच सवाल उठना स्वाभाविक है।
त्योहारी सीजन में मिल सकती है राहत?
त्योहारी मौसम में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में कीमतों पर मांग और आपूर्ति दोनों का असर पड़ सकता है। अगर मिलों से कम कीमत पर चीनी की आपूर्ति लगातार जारी रहती है और महंगे पुराने स्टॉक की बिक्री पूरी हो जाती है, तो खुदरा ग्राहकों को आने वाले दिनों में कुछ और राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
फिलहाल सरकारी आंकड़ों में औसत खुदरा कीमत में मामूली गिरावट दर्ज हुई है, जबकि मिल स्तर पर कमी काफी ज्यादा है। इसलिए अब नजर इस बात पर रहेगी कि सस्ती चीनी का फायदा आम उपभोक्ताओं तक कब और कितना पहुंचता है।