Saturday, August 15, 2026

षटतिला एकादशी 2026: इस एकादशी व्रत से धन, अन्न और स्वास्थ्य की होगी वृद्धि

by Neha
षटतिला एकादशी 2026: इस एकादशी व्रत से धन, अन्न और स्वास्थ्य की होगी वृद्धि

षटतिला एकादशी 2026: 14 जनवरी को षटतिला एकादशी का व्रत करें और घर में धन, अन्न और स्वास्थ्य की वृद्धि पाएं। जानें कथा, महत्व और पूजा विधि।

षटतिला एकादशी 2026 का व्रत 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस एकादशी का उपवास करने से शरीर में निरोगता आती है और अन्न, तिल, धन आदि का दान करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है। आइए जानते हैं षटतिला एकादशी की कथा और इसका महत्व।

षटतिला एकादशी की कथा

नारद मुनि ने एक बार भगवान विष्णु से पूछा कि षटतिला एकादशी का महत्व क्या है। तब भगवान ने उन्हें सत्य वृत्तान्त सुनाया। बहुत समय पहले एक ब्राह्मणी रहती थी जो हमेशा व्रत-उपवास किया करती थी। वह अत्यंत बुद्धिमान और धर्मनिष्ठ थी, लेकिन उसने कभी भी देवताओं या ब्राह्मणों के लिए अन्नादि दान नहीं किया।

भगवान विष्णु ब्राह्मण का रूप लेकर मृत्युलोक में गए और ब्राह्मणी से अन्न की भिक्षा मांगी। उसने केवल एक मिट्टी का पिण्ड दिया। इसके बाद ब्राह्मणी का देह त्याग हो गया। मिट्टी के पिण्ड के प्रभाव से उसे आम का वृक्ष और घर मिला, लेकिन घर वस्तुओं से खाली था।

ब्राह्मणी ने प्रभु से पूछा कि उसका घर खाली क्यों है। तब भगवान विष्णु ने कहा कि जब देव-स्त्रियां उसे देखने आयें, तब वे उसे एकादशी व्रत का महत्व और विधि बताएं। ब्राह्मणी ने उनके कहे अनुसार षटतिला एकादशी का व्रत किया और उसके प्रभाव से उसका घर धन्य-धान्य से भर गया।

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षटतिला एकादशी का महत्व

  • इस व्रत को करने से जन्म-जन्म की निरोगता प्राप्त होती है।

  • सभी पाप नष्ट होते हैं और मनुष्य का जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है।

  • यह कथा बताती है कि दान और धार्मिक कृत्यों के बिना व्रत पूर्ण नहीं होता।

  • अन्न, तिल और अन्य दान करने से घर में धन और अन्न की वृद्धि होती है।

षटतिला एकादशी 2026 के उपाय

  1. व्रत करें और निर्जला या फलाहार का पालन करें।

  2. ब्राह्मणों, गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, तिल और धन का दान करें।

  3. व्रत के दिन भगवान विष्णु का ध्यान और भजन करें।

  4. व्रत को ध्यानपूर्वक और श्रद्धा के साथ पूर्ण करें ताकि समृद्धि प्राप्त हो।

षटतिला एकादशी का उपवास केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह मानसिक और भौतिक समृद्धि का मार्ग भी है।

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