Thursday, October 1, 2026

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाओं का दावा फेल, दवाओं के लिए घंटों इंतजार

by editor
दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाओं का दावा फेल, दवाओं के लिए घंटों इंतजार

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दैनिक रूप से मरीजों और तीमारदारों को मुफ्त दवा लेने के लिए लंबी कतारों से गुजरना पड़ता है। दवा काउंटर खुलने से दो-तीन घंटे पहले ही कई मरीज अस्पताल आते हैं और लाइन में लग जाते हैं।

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा लेने के लिए हर दिन लंबी कतार से गुजरना पड़ता है। दवा काउंटर खुलने से दो-तीन घंटे पहले ही कई मरीज अस्पताल आते हैं और लाइन में लग जाते हैं। काउंटर पर पहुंचने पर पर्ची पर लिखी सभी दवाएं नहीं मिलतीं। मरीजों को कुछ दवाओं के लिए बाहर के मेडिकल स्टोर में जाना पड़ता है। तीमारदारों और मरीजों ने अस्पतालों में दवा वितरण प्रणाली पर चर्चा करते हुए लंबे इंतजार और दवाओं की कमी को बड़ी समस्या बताया।

जब सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल में दवा लेने के लिए लगभग एक घंटे तक इंतजार करने वाले गौरव की बारी आई, तो उनके पास सिर्फ पर्ची की कुछ दवाएं थीं। शेष दवाएं नहीं थीं, इसलिए बाहर से खरीदना पड़ा। गौरव की यह एकमात्र समस्या नहीं है। दवा काउंटर पर मौजूद कई मरीजों ने बताया कि डॉक्टर की पर्ची मिलने के बाद उन्हें दवा लेने के लिए काफी देर खड़ा रहना पड़ता है। दवा मिलने में आम दिनों में भी लगभग एक घंटे लगता है।

सफदरजंग में पर्ची की सभी दवाएं उपलब्ध नहीं थीं: मोहम्मद हुसैन को भी सफदरजंग अस्पताल के दवा काउंटर पर ऐसा ही हुआ। इंतजार की एक लंबी कतार के बाद, पर्ची पर लिखी सभी दवाएं उपलब्ध नहीं थीं। दवाओं में से कुछ नहीं मिलीं, और बाकी को बाहर से खरीदने के लिए कहा गया।

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हुसैन को अस्पताल से बाहर एक मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ी। लंबे समय तक कतार में खड़े रहने के बाद मरीजों को अक्सर काउंटर पर “दवा उपलब्ध नहीं है”, “खत्म हो गया” या “बाहर से खरीद लें” जैसे जवाब मिलते हैं। इलाज के बिना अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का खर्च इससे बढ़ जाता है।

वृद्ध लोगों के लिए एक घंटे का इंतजार भी मुश्किल है: बुजुर्गों, दिव्यांगों और कमजोर मरीजों पर लंबी कतार का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। लंबी बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए भी इंतजार करना कठिन होता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए कुछ अस्पतालों में अलग दवा काउंटर हैं। ऐसी सुविधा को लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल बताता है।

आरएमएल में “नॉट अवेलेबल” की शिकायत

आरएमएल अस्पताल की कतार में खड़े रहीम ने बताया कि डॉक्टर ने कई दवाएं लिखी थीं। काउंटर से कुछ दवा मिली, लेकिन बाकी के लिए बाहर जाना पड़ा। यह स्थिति अन्य मरीजों की पर्चियों पर भी दिखाई दी। एक व्यक्ति को लिखी दो दवाओं में से सिर्फ एक मिली, जबकि कुछ पर्चियों पर एक के बाद एक दवाओं के सामने लिखा था कि वे नॉट अवेलेबल हैं। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में निर्धारित सूची के अनुसार मरीजों को निःशुल्क दवा दी जाती है। अस्पतालों की वेबसाइटों पर इसका भी उल्लेख है। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में सभी मरीजों को मुफ्त दवा दी जाती है। लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल का दावा है कि दिल्ली सरकार की ड्रग फॉर्मुलरी के तहत डॉक्टर की लिखी गई दवाएं फ्री में दी जाती हैं।

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