अकाल मृत्यु होने वाले प्रियजनों की आत्मा को शान्ति देने के लिए कुछ विशिष्ट उपाय बताए गए हैं। पितृ पक्ष में इन लोगों का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। जानिए इस दिन का धार्मिक महत्व और मरने वाले की शांति के लिए क्या किया जाता है।
पितृ पक्ष को श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस दौरान लोग तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं। हर तिथि पितृ पक्ष में विशिष्ट है। दिवंगत व्यक्ति की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करना आम है। लेकिन अल्प आयु में या अप्रत्याशित रूप से मरने वालों के लिए पितृ पक्ष में कुछ विशिष्ट कार्य करने का विधान है। आइए जानते हैं कि चतुर्दशी क्यों अकाल मरने वालों के लिए खास है और इस दिन कौन से उपाय करने चाहिए।
अकाल मृत्यु का क्या अर्थ है?
धार्मिक परंपराओं में, अकाल मृत्यु तब होती है जब कोई व्यक्ति निर्धारित उम्र से पहले मर जाता है। इसके साथ दुर्घटना, आग, गंभीर बीमारी, विष आदि से कम आयु में होने वाली मृत्यु को जोड़कर देखा जाता है। मृतकों के पितृ पक्ष में चतुर्दशी श्राद्ध का विधान है।
also read: विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत 29 या 30 सितंबर को…
चतुर्दशी तिथि इतनी खास क्यों है?
मृत पिता को तर्पण और श्राद्ध करने के लिए पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जिसे चतुर्दशी श्राद्ध कहा जाता है। इस दिन शिव पूजा करना भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तिथि भगवान शिव से जुड़ी हुई है। इसलिए इस दिन शिव की पूजा करके मरने वाले लोगों की शांति और मोक्ष की प्रार्थना की जाती है।
इस तरह अभिषेक करें
चतुर्दशी श्राद्ध के दिन सुबह स्नान करने के बाद एक लोटे में पवित्र जल और गंगाजल डालें। काले तिल डालें। इसके बाद, अकाल मरने वाले परिवार के नाम से शिव को अभिषेक करें। इस दौरान दिवंगत आत्मा की मोक्ष और शांति की प्रार्थना करें। यह स्वीकार किया जाता है कि इस काम का पुण्य दिवंगत को दिया जा सकता है।
श्रीमद्भागवत पुराण का पाठ
पितृ पक्ष में अकाल मृत्यु होने वाले प्रियजनों के लिए श्रीमद्भागवत पुराण का पाठ या सुनना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका पाठ या सुनने से मरने वाले आत्मा की शांति और मोक्ष की प्रार्थना की जाती है। यह प्रार्थना पितृ पक्ष के पंद्रह दिनों में की जाती है।
श्राद्ध का शुभ समय
पंचांगानुसार, चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर रात 10:15 बजे से 9 अक्टूबर रात 9:35 बजे तक रहेगी। कुतुप मुहूर्त चतुर्दशी श्राद्ध के लिए सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। बाद में रात्रि मुहूर्त 12:31 से 1:18 बजे और अपराह्न 1:18 से 3:38 बजे रहेगा। इन्हीं समयावधियों में तर्पण और श्राद्ध कर सकते हैं।