Wednesday, August 12, 2026

नाग पंचमी 2026: नाग पंचमी पर क्यों की जाती है नाग देवता की पूजा? जानें पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व

by Neha
नाग पंचमी 2026: नाग पंचमी पर क्यों की जाती है नाग देवता की पूजा? जानें पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व

नाग पंचमी 2026 पर जानें नाग देवता की पूजा का महत्व, राजा परीक्षित और तक्षक नाग की पौराणिक कथा, पूजा विधि और इस पर्व से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।

नाग पंचमी 2026: नाग पंचमी हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में शामिल है। यह त्योहार सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी प्रकृति, नागों और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का संदेश देती है। साल 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी।

नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?

नाग पंचमी का पर्व नाग देवता को समर्पित माना जाता है। इस दिन लोग नाग देवता के चित्र या प्रतिमा की पूजा करते हैं और फूल, अक्षत, मिठाई आदि अर्पित करते हैं। नाग पंचमी से जुड़ी एक प्रमुख पौराणिक कथा राजा परीक्षित, तक्षक नाग और उनके पुत्र जन्मेजय से संबंधित है।

राजा परीक्षित और तक्षक नाग की कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा परीक्षित एक बार शिकार के दौरान जंगल में रास्ता भटक गए। उन्हें काफी प्यास लगी और वे एक आश्रम पहुंचे। वहां ऋषि शमीक ध्यान में लीन थे। राजा ने उनसे पानी मांगा, लेकिन ध्यान में होने के कारण ऋषि कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सके।

राजा परीक्षित को इस बात पर क्रोध आ गया। उन्होंने ऋषि के गले में एक मृत सांप डाल दिया और वहां से चले गए। जब ऋषि के पुत्र श्रृंगी को इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु हो जाएगी। श्राप के अनुसार सातवें दिन तक्षक नाग ने राजा परीक्षित को डस लिया और उनकी मृत्यु हो गई।

जन्मेजय ने क्यों कराया सर्प यज्ञ?

पिता की मृत्यु से दुखी राजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने सभी नागों को समाप्त करने का संकल्प लिया। उन्होंने नागों के विनाश के लिए एक विशाल सर्प यज्ञ शुरू कराया। यज्ञ के प्रभाव से अनेक नाग अग्निकुंड की ओर खिंचे चले जाने लगे। तक्षक नाग ने अपनी रक्षा के लिए देवराज इंद्र की शरण ली।

स्थिति गंभीर होने पर देवताओं ने आस्तिक मुनि से यज्ञ को रोकने का आग्रह किया। आस्तिक मुनि ने जन्मेजय को समझाया कि किसी भी जीव का बिना कारण विनाश करना उचित नहीं है।

उनकी बात समझकर जन्मेजय ने सर्प यज्ञ रोक दिया और नागों के प्रति अपना क्रोध त्याग दिया। मान्यता है कि यह घटना सावन शुक्ल पंचमी के दिन हुई थी। इसी वजह से इस दिन नाग देवता की पूजा की परंपरा शुरू होने की मान्यता है।

नाग पंचमी पर नागों की पूजा का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यताओं में नागों को शक्ति, संरक्षण और प्रकृति के संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। सांपों का कृषि और पर्यावरण में भी महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि वे चूहों जैसे जीवों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

इसी वजह से नाग पंचमी को केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने वाले त्योहार के रूप में भी देखा जाता है।

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नाग पंचमी पर कैसे की जाती है पूजा?

नाग पंचमी के दिन कई जगहों पर नाग देवता का चित्र बनाकर या उनकी प्रतिमा स्थापित करके पूजा की जाती है। पूजा में फूल, अक्षत, हल्दी, कुमकुम और मिठाई जैसी सामग्री अर्पित की जाती है।

कुछ क्षेत्रों में घर के बाहर या पूजा स्थल पर नाग का चित्र बनाने की भी परंपरा है। अलग-अलग राज्यों और समुदायों में नाग पंचमी की पूजा की विधि और परंपराएं अलग हो सकती हैं।

धार्मिक ग्रंथों में नागों का महत्व

हिंदू धार्मिक परंपराओं में नागों का विशेष स्थान बताया गया है। भगवान शिव के गले में नाग का होना और भगवान विष्णु का शेषनाग पर विराजमान होना नागों के धार्मिक महत्व को दर्शाता है।

भगवद्गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण ने नागों में स्वयं को अनंत बताया है। इस कारण धार्मिक मान्यताओं में नागों की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।

नाग पंचमी का संदेश

नाग पंचमी की पौराणिक कथा का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि प्रकृति में मौजूद हर जीव का अपना महत्व है। बिना कारण किसी जीव को नुकसान पहुंचाने के बजाय मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

इसलिए नाग पंचमी को नाग देवता की आस्था के साथ-साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं के सम्मान का पर्व भी माना जाता है।

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