Friday, July 24, 2026

बच्चों में बढ़ रही पित्त की पथरी: कारण, लक्षण और बचाव के तरीके

by Neha
बच्चों में बढ़ रही पित्त की पथरी: कारण, लक्षण और बचाव के तरीके

बच्चों में पित्त की पथरी (Gallstones) के बढ़ते मामले: कारण, लक्षण और बचाव के आसान उपाय जानें। सही खानपान और एक्टिव लाइफस्टाइल से बच्चों को पथरी से बचाएं।

आजकल बच्चों में पित्त की पथरी यानी Gallstones के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले यह समस्या सिर्फ वयस्कों या बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन अब 5-6 साल के छोटे बच्चों में भी इसके केस सामने आने लगे हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में बच्चों में पित्त की पथरी के बढ़ते मामलों ने डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है।

पित्त की पथरी क्या है?

पित्त की पथरी यानी Gallstones, गॉलब्लेडर में बनने वाले छोटे ठोस टुकड़े होते हैं। गॉलब्लेडर पेट के अंदर एक छोटा थैला है जो पाचन में मदद करता है। पथरी मुख्यतः कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन से बनती है। अगर पथरी बड़ी हो जाए या पित्त के प्रवाह को रोक दे, तो बच्चे को पेट में तेज दर्द, उल्टी, मतली, गैस और कभी-कभी बुखार या पीलिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

बच्चों में पित्त की पथरी के कारण

  1. कम शारीरिक गतिविधि: मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम की आदतें बच्चों को बाहर खेलने से रोकती हैं, जिससे मोटापा बढ़ता है।

  2. अनियमित खानपान: जंक फूड, फास्ट फूड, तले-भुने और प्रोसेस्ड खाने की बढ़ती आदत से पित्त की पथरी की संभावना बढ़ती है।

  3. परिवारिक इतिहास: अगर परिवार में किसी को पहले से पित्त की पथरी रही हो, तो बच्चों में भी इसका खतरा बढ़ जाता है।

  4. रक्त संबंधी बीमारियां: थैलेसीमिया जैसी ब्लड डिसऑर्डर वाली स्थितियों में भी पित्त की पथरी हो सकती है।

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लक्षण

बच्चों में पित्त की पथरी के लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते। कुछ आम लक्षण हैं:

  • बार-बार पेट दर्द, खासकर ऊपरी हिस्से में

  • उल्टी या मतली

  • खाने से मन न लगना

  • पेट फूलना या गैस

  • कभी-कभी तेज बुखार या पीलिया

यदि बच्चा लगातार पेट दर्द की शिकायत करता है, तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से जांच करवाएं।

बचाव के तरीके

  • बच्चों को हरी सब्जियां, फल, दालें और फाइबर युक्त आहार दें।

  • जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और बाहर का खाना कम दें।

  • बच्चों को खेलने-कूदने के लिए प्रेरित करें और स्क्रीन टाइम सीमित करें।

  • परिवार में पित्त की पथरी या मेटाबोलिक बीमारी होने पर नियमित जांच कराएं।

सही लाइफस्टाइल और संतुलित आहार अपनाकर बच्चों में पित्त की पथरी को रोका जा सकता है।

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