Diabetes Shoulder: डायबिटीज मरीजों में फ्रोजन शोल्डर का खतरा बढ़ता है। कंधे में दर्द और जकड़न को नजरअंदाज न करें, समय पर इलाज और शुगर कंट्रोल जरूरी।
Diabetes Shoulder: डायबिटीज केवल ब्लड शुगर तक सीमित बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। इन्हीं में से एक गंभीर समस्या है फ्रोजन शोल्डर, जिसे आम भाषा में “डायबिटीज शोल्डर” भी कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या धीरे-धीरे कंधे की मूवमेंट को सीमित कर देती है और रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करती है।
क्या है फ्रोजन शोल्डर?
फ्रोजन शोल्डर एक ऐसी स्थिति है जिसमें कंधे के जोड़ के आसपास मौजूद टिश्यू (कनेक्टिव टिश्यू) मोटे और सख्त हो जाते हैं। इसके कारण कंधे में दर्द, जकड़न और मूवमेंट में कठिनाई होने लगती है। शुरुआत में हल्का दर्द होता है, लेकिन समय के साथ कंधे की गति काफी सीमित हो जाती है।
डायबिटीज में क्यों बढ़ जाता है इसका खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर शरीर के टिश्यू पर असर डालता है। अधिक ग्लूकोज कोलेजन प्रोटीन को प्रभावित करता है, जिससे टिश्यू की लचीलापन कम हो जाती है।
इसके अलावा शरीर में सूजन और कंधे के जोड़ तक कम ब्लड फ्लो भी इस समस्या को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। रिसर्च के अनुसार डायबिटीज मरीजों में कंधे से जुड़ी समस्याओं का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में कई गुना अधिक पाया गया है।
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फ्रोजन शोल्डर के तीन चरण
फ्रोजन शोल्डर आमतौर पर तीन चरणों में विकसित होता है:
फ्रीजिंग स्टेज: दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है और कंधे की मूवमेंट कम होने लगती है
फ्रोजन स्टेज: दर्द कुछ कम हो सकता है, लेकिन जकड़न बनी रहती है
थॉइंग स्टेज: धीरे-धीरे कंधे की मूवमेंट वापस आने लगती है
यह स्थिति कई महीनों से लेकर 1–2 साल तक चल सकती है।
कैसे होती है पहचान?
डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर एक्स-रे या एमआरआई जैसे टेस्ट के जरिए फ्रोजन शोल्डर का पता लगाते हैं। समय पर पहचान होने से समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
इलाज और बचाव
फ्रोजन शोल्डर के इलाज का मुख्य उद्देश्य दर्द कम करना और कंधे की मूवमेंट को बहाल करना होता है।
- दर्द निवारक दवाएं
- फिजियोथेरेपी और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज
- ब्लड शुगर का नियंत्रण
- गंभीर मामलों में इंजेक्शन या अन्य चिकित्सा प्रक्रियाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज को नियंत्रित रखना इस समस्या से बचाव का सबसे महत्वपूर्ण उपाय है।