Bluetooth Earbuds Cancer Risk: क्या ब्लूटूथ ईयरबड्स से ब्रेन कैंसर का खतरा होता है? एक्सपर्ट्स के अनुसार इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। जानें वायरलेस डिवाइस से जुड़ी सच्चाई और जरूरी सावधानियां।
Bluetooth Earbuds Cancer Risk: आज के समय में ब्लूटूथ ईयरबड्स और वायरलेस हेडफोन्स लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस कॉल, म्यूजिक सुनने, जिम या ट्रैवल के दौरान इनका इस्तेमाल आम हो गया है। लेकिन इनके बढ़ते उपयोग के साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या लंबे समय तक ब्लूटूथ ईयरबड्स का इस्तेमाल ब्रेन कैंसर का कारण बन सकता है?
ब्लूटूथ टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?
ब्लूटूथ डिवाइस रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) के जरिए काम करते हैं, जिसके कारण इसे लेकर कई लोगों में चिंता देखी जाती है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार ब्लूटूथ से निकलने वाला रेडिएशन नॉन-आयोनाइजिंग प्रकार का होता है, जो एक्स-रे जैसे खतरनाक आयोनाइजिंग रेडिएशन से पूरी तरह अलग है।
क्या ब्रेन कैंसर का कोई सीधा खतरा है? (Bluetooth Earbuds Cancer Risk)
विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक किसी भी वैज्ञानिक रिसर्च में ब्लूटूथ ईयरबड्स और ब्रेन कैंसर के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है। ब्लूटूथ डिवाइस से निकलने वाला रेडिएशन मोबाइल फोन की तुलना में काफी कम होता है, जिससे खतरे की संभावना और भी कम मानी जाती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के बायोइंजीनियरिंग प्रोफेसर डॉ. केन फोस्टर के अनुसार, वायरलेस ईयरबड्स से मिलने वाला रेडिएशन इतना कम होता है कि यह फोन को कान से लगाकर बात करने की तुलना में भी कम प्रभाव डालता है।
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क्या डीएनए पर पड़ता है कोई असर?
विशेषज्ञ बताते हैं कि आयोनाइजिंग रेडिएशन शरीर के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है और कैंसर का कारण बन सकता है। लेकिन ब्लूटूथ डिवाइस इस श्रेणी में नहीं आते, इसलिए इनसे डीएनए को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं है। हालांकि वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि वायरलेस तकनीक और RF रेडिएशन पर अभी और अधिक शोध की आवश्यकता है।
अब तक क्या कहती हैं स्टडीज?
अब तक की उपलब्ध रिसर्च में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि ब्लूटूथ ईयरबड्स ब्रेन ट्यूमर या कैंसर का कारण बनते हैं। इसलिए विशेषज्ञ फिलहाल इन्हें सुरक्षित मानते हैं।
इस्तेमाल करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
डॉ. केन फोस्टर के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अतिरिक्त सावधानी रखना चाहता है तो वह जरूरत न होने पर ईयरबड्स का इस्तेमाल कम कर सकता है या वायर्ड हेडफोन का विकल्प चुन सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि ईयरबड्स का उपयोग लंबे समय तक लगातार न करें। तेज आवाज में लगातार सुनने से सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है, जो एक वास्तविक जोखिम है।
इसलिए सलाह दी जाती है कि हेडफोन का उपयोग 60 से 90 मिनट तक सीमित रखें, बीच-बीच में ब्रेक लें और वॉल्यूम 60 से 80 प्रतिशत से अधिक न रखें।