Thursday, September 3, 2026

हरतालिका तीज 2026: 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी, जानें सुहागिन और कुंवारी कन्याएं कैसे करें पूजा

by Neha
हरतालिका तीज 2026: 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी, जानें सुहागिन और कुंवारी कन्याएं कैसे करें पूजा

हरतालिका तीज 2026: 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी साथ हैं। जानें पूजा मुहूर्त, सुहागिनों-कुंवारी कन्याओं के व्रत और गणेश स्थापना विधि।

हरतालिका तीज 2026: 14 सितंबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों पर्व पड़ रहे हैं। ऐसे में सुहागिन महिलाओं के साथ कुंवारी कन्याओं के लिए भी यह दिन विशेष माना जा रहा है। एक ओर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर दांपत्य सुख और अच्छे जीवनसाथी की कामना करेंगी, वहीं दूसरी ओर घरों में भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी।

14 सितंबर को दो बड़े पर्व क्यों हैं खास?

हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं।

कुंवारी कन्याएं भी माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करके मनचाहे जीवनसाथी की कामना करती हैं। वहीं, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। गणपति को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों के देवता के रूप में पूजा जाता है।

हरतालिका तीज और गणेश पूजा का शुभ समय

14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह का समय महत्वपूर्ण रहेगा। दिए गए पंचांग के अनुसार तीज पूजा का समय लगभग सुबह 6:03 बजे से 8:27 बजे तक बताया गया है।

वहीं गणेश चतुर्थी की मध्याह्न पूजा का समय लगभग सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। पूजा का सटीक समय शहर और पंचांग के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।

सुहागिन महिलाएं हरतालिका तीज पर कैसे करें पूजा?

हरतालिका तीज पर महिलाएं सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा की तैयारी करें। परंपरा के अनुसार लाल या हरे रंग के वस्त्र और सुहाग की सामग्री का प्रयोग किया जाता है।

पूजा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करके उनका पूजन करें। कई परंपराओं में मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की भी मान्यता है।

माता पार्वती को फूल, फल, नैवेद्य और सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद हरतालिका तीज की कथा सुनकर आरती की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार रात्रि जागरण और अगले दिन व्रत पारण करती हैं।

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कुंवारी लड़कियां कैसे रखें हरतालिका तीज व्रत?

हरतालिका तीज केवल सुहागिन महिलाओं के लिए ही नहीं मानी जाती। कुंवारी कन्याएं भी भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अच्छे जीवनसाथी की कामना से व्रत रख सकती हैं।

हालांकि निर्जला व्रत रखना स्वास्थ्य की स्थिति और व्यक्तिगत क्षमता पर निर्भर करता है। यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे तो कठोर व्रत रखने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार करना बेहतर है।

व्रत की विधि और नियम परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। पहली बार व्रत रखने वाली कन्याओं और महिलाओं को अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-विधि अपनानी चाहिए।

हरतालिका तीज पूजा में किन बातों का रखें ध्यान?

  • सुबह स्नान करके पूजा स्थल को साफ करें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
  • सुहागिन महिलाएं माता पार्वती को सिंदूर, चूड़ी, बिंदी और मेहंदी जैसी सामग्री अर्पित कर सकती हैं।
  • कुंवारी कन्याएं फूल, फल और नैवेद्य अर्पित कर पूजा कर सकती हैं।
  • हरतालिका तीज की कथा सुनें और आरती करें।
  • मिट्टी या बालू से बनाई गई प्रतिमा का विसर्जन अपनी परंपरा के अनुसार करें।
  • व्रत के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखें।

गणेश चतुर्थी पर कैसे करें गणपति स्थापना?

गणेश चतुर्थी के दिन घर के साफ स्थान पर चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। गणपति के सामने कलश स्थापित करके उसके ऊपर नारियल रखा जा सकता है। इसके बाद भगवान गणेश का आवाहन कर पूजा शुरू करें।

गणेशजी को जल, अक्षत, चंदन, फूल और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार नैवेद्य चढ़ाएं। गणेश चतुर्थी की कथा और आरती के बाद परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

गणपति पूजा में क्या चढ़ाएं?

भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा फूल, चंदन, अक्षत, धूप, दीप और फल भी पूजा में शामिल किए जा सकते हैं।

गणेश स्थापना के बाद श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रतिदिन पूजा और आरती कर सकते हैं। गणपति विसर्जन की तिथि और विधि भी स्थानीय परंपरा व पंचांग के अनुसार तय की जाती है।

एक ही दिन पड़ रहे दोनों पर्व का क्या महत्व है?

14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का संयोग होने से धार्मिक गतिविधियों के लिहाज से दिन काफी खास रहेगा। सुबह शिव-पार्वती की पूजा और इसके बाद गणपति स्थापना के कारण भक्तों के लिए पूजा का विशेष अवसर रहेगा।

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