Sunday, July 26, 2026

CM Yogi ने आगामी जुलाई में प्रस्तावित वन महोत्सव और नदियों के पुनर्जीवन से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

by editor
CM Yogi ने आगामी जुलाई में प्रस्तावित वन महोत्सव और नदियों के पुनर्जीवन से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

CM Yogi ने आज अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में आगामी जुलाई में प्रस्तावित वन महोत्सव और नदियों के पुनरुद्धार की तैयारियों की समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने वृक्षारोपण महाभियान-2025 के ‘लोगो’ का अनावरण किया और निर्देश दिए कि इस अभियान को एक व्यापक जनआंदोलन का रूप दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार प्रदेश की कुल जनसंख्या से अधिक पौधे एक ही दिन में रोपने का लक्ष्य तय किया गया है।

उन्होंने बताया कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ की थीम पर आधारित यह अभियान प्रदेश को हीटवेव से ग्रीनवेव की ओर ले जाएगा। वर्ष 2017 से 2024 के बीच 204.92 करोड़ से अधिक पौधारोपण हुआ है और भारतीय वन सर्वेक्षण, देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार 2017 से 2023 के बीच प्रदेश के हरित क्षेत्र में 3 लाख एकड़ की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि जनभागीदारी का परिणाम है।

इस वर्ष एक नई पहल के रूप में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वन महोत्सव के दौरान जन्म लेने वाले प्रत्येक नवजात को ‘ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट’ और उसके माता-पिता को एक पौधा भेंट किया जाएगा। यह पहल पर्यावरण को व्यक्तिगत जीवन से जोड़ने का एक प्रयास होगी, जिसमें पौधे की देखभाल उसी संवेदनशीलता से की जाएगी जैसी नवजात शिशु की होती है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार 35 करोड़ पौधे रोपे जाने का लक्ष्य रखा गया है, जो प्रदेश की आबादी से अधिक है। इनमें से 12.6 करोड़ पौधे वन विभाग और 22.4 करोड़ अन्य विभागों द्वारा लगाए जाएंगे। पौधों की आपूर्ति के लिए राज्य में कुल 2,586 सरकारी और निजी पौधशालाएं तैयार हैं जिनमें फलदार, औद्योगिक, छायादार और चारा प्रजातियों के पौधे तैयार किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट अलंकार के तहत सभी स्कूलों में बड़े पैमाने पर पौधारोपण हो और मेडिकल कॉलेजों व जिला अस्पतालों में सहजन व अन्य छायादार पेड़ों का रोपण अनिवार्य किया जाए ताकि रोगियों और उनके परिजनों को राहत मिले।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी औद्योगिक क्षेत्रों में घने पौधारोपण कर वातावरण को हरित और स्वच्छ बनाया जाए। गो-आश्रय स्थलों में नीम, पाकड़, पीपल जैसे वृक्ष लगाए जाएं जो गोवंश के लिए उपयोगी होते हैं।

इस अभियान में नदियों के संरक्षण को भी प्रमुखता देने की बात कही गई। उन्होंने निर्देश दिए कि नदियों के किनारों पर वृक्षारोपण कराया जाए और जल स्रोतों के संरक्षण हेतु तालाबों के चारों ओर भी पौधे लगाए जाएं। जरूरत पड़ने पर नदियों का चैनलाइजेशन भी किया जाए।

जनभागीदारी पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान को जनता से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए नुक्कड़ नाटक, चित्रकला, वाद-विवाद, प्रभात फेरी, और फोटोग्राफी जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित हों। साथ ही, सार्वजनिक स्थलों पर फलदार वृक्षों का रोपण हो जिससे पोषण के साथ हरियाली भी बढ़े।

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर लिंक, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, आगरा-लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे के किनारों पर वृक्षारोपण के निर्देश दिए, ताकि हरित पट्टियाँ विकसित हो सकें। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों से कम से कम एक पौधा लगवाने का लक्ष्य भी तय किया गया है। ग्राम सचिवालय, कृषि विज्ञान केंद्र और सार्वजनिक संस्थानों को भी इस लक्ष्य से जोड़ा जाए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पौधारोपण जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उनकी सुरक्षा भी है। सभी पौधों की जियो टैगिंग हो और उनकी फेंसिंग की व्यवस्था की जाए। जनता को केवल पौधे लगाने तक सीमित न रखकर उनकी देखभाल और संरक्षण के लिए भी प्रेरित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। जब हर घर एक पौधा लगाएगा और हर नागरिक उसकी रक्षा सुनिश्चित करेगा, तब उत्तर प्रदेश न केवल देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य होगा, बल्कि सबसे हरित और पर्यावरण के प्रति जागरूक राज्य के रूप में भी पहचाना जाएगा।

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