Monday, August 10, 2026

Sawan Amavasya 2026: 12 अगस्त को अमावस्या और सूर्य ग्रहण का संयोग, भारत में लगेगा सूतक? जानें पूजा के सही नियम

by Neha
Sawan Amavasya 2026: 12 अगस्त को अमावस्या और सूर्य ग्रहण का संयोग, भारत में लगेगा सूतक? जानें पूजा के सही नियम

Sawan Amavasya 2026: 12 अगस्त 2026 को अमावस्या और सूर्य ग्रहण का संयोग है। जानें भारत में ग्रहण दिखेगा या नहीं, सूतक लगेगा या नहीं और पूजा के नियम।

Sawan Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पूजा, पितरों के स्मरण, दान और आत्मचिंतन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026 में श्रावण कृष्ण अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को है। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 12 अगस्त को रात करीब 1:52 बजे शुरू होकर उसी रात 11:06 बजे समाप्त होगी।

इसी दिन 12 अगस्त को एक पूर्ण सूर्य ग्रहण भी होगा, लेकिन इसका मुख्य दृश्य क्षेत्र भारत में नहीं है। नासा के अनुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से में दिखाई देगा, जबकि आंशिक ग्रहण यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में देखा जा सकेगा। भारत इस दृश्यता क्षेत्र में शामिल नहीं है।

12 अगस्त को कब है अमावस्या?

नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार श्रावण अमावस्या 12 अगस्त 2026 को है। अमावस्या तिथि रात 1:52 बजे शुरू होगी और रात 11:06 बजे तक रहेगी। अलग-अलग शहरों में पंचांग के समय में कुछ अंतर हो सकता है, इसलिए पूजा या तर्पण के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।

अमावस्या के दिन सुबह स्नान, दान, पितरों का स्मरण और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा करने की मान्यता है। श्रावण मास होने के कारण इस दिन भगवान शिव की आराधना को भी विशेष महत्व दिया जाता है।

क्या 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण भी लगेगा?

हां, 12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। हालांकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। नासा के अनुसार ग्रहण का पूर्ण चरण रूस के उत्तरी हिस्से, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन में दिखाई देगा। कई अन्य क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण नजर आएगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों को ग्रहण देखने के लिए विशेष सावधानी की जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां से सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

भारत में सूर्य ग्रहण का सूतक लगेगा या नहीं?

धार्मिक परंपराओं में सूतक को सामान्यतः दिखाई देने वाले ग्रहण से जोड़ा जाता है। चूंकि 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में सामान्य दृश्यता-आधारित धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका सूतक लागू नहीं माना जाएगा।

ऐसे में भारत में रहने वाले श्रद्धालु अपनी स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार अमावस्या का स्नान, दान, तर्पण और पूजा कर सकते हैं। हालांकि किसी विशेष संप्रदाय या परिवार में अलग परंपरा हो तो उसके अनुसार आचरण किया जा सकता है।

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अमावस्या पर पितरों के लिए करें तर्पण

अमावस्या को पितरों के स्मरण और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार सुबह स्नान के बाद पितरों का ध्यान करते हुए जल अर्पित किया जाता है। जल में काले तिल मिलाकर तर्पण करने की भी परंपरा है।

जिन लोगों को अपने पूर्वजों के नाम याद हैं, वे उनका स्मरण कर सकते हैं। इसके बाद जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र अथवा अन्य उपयोगी वस्तु का दान करना शुभ माना जाता है। यदि आपके परिवार में पितृ तर्पण या श्राद्ध की कोई विशेष परंपरा है तो उसी विधि का पालन करना बेहतर है।

श्रावण अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा

श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इसलिए अमावस्या के दिन शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करके भगवान शिव का ध्यान किया जा सकता है। बेलपत्र उपलब्ध हो तो उसे भी अर्पित किया जा सकता है।

पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना भक्तिभाव के साथ किया जा सकता है। शिव पूजा के साथ मन को शांत रखने और अच्छे कार्यों का संकल्प लेना भी इस दिन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

हरियाली अमावस्या पर पौधा लगाना शुभ

श्रावण अमावस्या को कई क्षेत्रों में हरियाली अमावस्या के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी व्यक्त करने की परंपरा है।

अगर संभव हो तो इस दिन किसी उपयुक्त स्थान पर पौधा लगाएं और उसकी नियमित देखभाल का संकल्प लें। जगह उपलब्ध न होने पर किसी मौजूदा पेड़-पौधे की देखभाल करना भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अच्छा कदम हो सकता है। धार्मिक मान्यता के साथ-साथ इसका व्यावहारिक महत्व भी है, क्योंकि पौधों की देखभाल पर्यावरण को बेहतर बनाने में योगदान देती है।

धन संबंधी मामलों में क्या करें?

अमावस्या पर धार्मिक मान्यता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना शुभ माना जाता है। अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार भोजन, अनाज, कपड़े या आवश्यक वस्तुएं दान की जा सकती हैं।

इसके साथ ही इस दिन अनावश्यक खर्च कम करने, नियमित बचत शुरू करने और पुराने आर्थिक दायित्वों की समीक्षा करने का संकल्प लिया जा सकता है। धार्मिक आस्था के साथ वित्तीय अनुशासन अपनाना लंबे समय में अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।

अमावस्या पर किन बातों से बचें?

अमावस्या के दिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार क्रोध, विवाद, अपशब्द और नकारात्मक व्यवहार से दूर रहने की सलाह दी जाती है। जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान करने या किसी जीव-जंतु को परेशान करने से भी बचना चाहिए।

साथ ही किसी भी परेशानी को केवल ग्रहण, पितृ दोष या किसी नकारात्मक शक्ति से जोड़कर डरने की जरूरत नहीं है। जीवन से जुड़ी गंभीर आर्थिक, पारिवारिक या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए व्यावहारिक समाधान और योग्य विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

12 अगस्त की अमावस्या का क्या है खास महत्व?

12 अगस्त 2026 को श्रावण अमावस्या और सूर्य ग्रहण एक ही दिन पड़ रहे हैं, लेकिन भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में अमावस्या से जुड़े धार्मिक कार्यों को लेकर अनावश्यक भ्रम की जरूरत नहीं है।

इस दिन भगवान शिव की आराधना, पितरों का स्मरण, जरूरतमंदों की सहायता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी जैसे कार्य किए जा सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह दिन आत्मचिंतन और सकारात्मक संकल्प लेने का अवसर माना जा सकता है।

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