Saturday, September 12, 2026

कुंडी सोटेश्वर महादेव का मंदिर: महादेव की बारात, जो कैलाश से उतरकर इस पवित्र स्थान पर रुकी थी, इस रहस्यमयी पेड़ पर कैसे पहुंचे?

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कुंडी सोटेश्वर महादेव का मंदिर: महादेव की बारात, जो कैलाश से उतरकर इस पवित्र स्थान पर रुकी थी, इस रहस्यमयी पेड़ पर कैसे पहुंचे?

कुंडी सोटेश्वर महादेव का मंदिर: हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र में स्थित श्री कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव से जुड़ी एक प्राचीन धार्मिक मान्यता के लिए जाना जाता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि भगवान शिव माता सती से शादी करने के लिए बारात लेकर निकले थे और इसी स्थान पर कुछ समय रुकी थी। मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग भी है, जिसके दर्शन और जलाभिषेक के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इस मंदिर की विशिष्ट बातें जानें..।

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कुंडी सोटेश्वर महादेव का मंदिर:

देवभूमि उत्तराखंड के कण-कण में भोलेनाथ का वास माना जाता है। उत्तराखंड में कई ऐसे पौराणिक स्थान हैं, जो भगवान शिव से विशेष रूप से जुड़े हैं क्योंकि दक्ष नगरी कनखल को महादेव की ससुराल माना जाता है। ऐसे ही श्री कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर राजाजी टाइगर रिजर्व के घने जंगलों, श्यामपुर क्षेत्र और सज्जनपुर पीली (नजीबाबाद रोड) के पास है। यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और धार्मिक महत्व के कारण लोगों को आकर्षित करता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब भगवान शिव माता पार्वती से शादी करने के लिए बारात लेकर निकले, तो वह कुछ समय के लिए इसी स्थान पर रुकी थी।

हरिद्वार में स्थित भगवान शिव को समर्पित श्री कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर, हर प्रार्थना सुनते हैं। माना जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू (स्वयं प्रकट) है, और अगर कोई सच्चे मन से प्रार्थना करता है, तो भगवान शिव अवश्य सुनेंगे। हरिद्वार जाते समय इस पवित्र मंदिर का दर्शन अवश्य करें। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और शांत वातावरण से भक्तों को गहरी शांति और आस्था का अनुभव होता है।

इस मंदिर में स्थापित भगवान शिव का शिवलिंग खुदाई के दौरान प्रकट हुआ था। किंवदंती बताती हैं कि भोलेनाथ का यह मंदिर आज भी उनकी बारात का सबूत है। माना जाता है कि भगवान शिव की साधारण नहीं थी। इसमें देवताओं, उनके गण, भूत-प्रेत और अन्य अलौकिक शक्तियों का समावेश था। इसलिए शिव को भूतनाथ भी कहा जाता है। कथाओं में कहा जाता है कि भगवान शंकर की बारात, जो कैलाश से उतरकर इसी स्थान पर रुकी थी, यहीं रुकी थी और भगवान शिव ने बारात के दौरान विश्राम किया था। यहीं पर उनके सैनिकों ने कुंडी सोटा में भांग घोटी थी, जिसके अवशेष आज भी इस स्थान की खुदाई में बार-बार देखे जा सकते हैं।

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