पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹3 बढ़ोतरी और धान MSP में मामूली वृद्धि को लेकर हरपाल सिंह चीमा ने सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया।
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में मात्र ₹72 प्रति क्विंटल की मामूली वृद्धि की घोषणा की गई है। इन दोनों फैसलों को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से किसानों की लागत बढ़ जाएगी, जबकि MSP में की गई मामूली बढ़ोतरी उस बढ़े हुए खर्च की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
किसानों की उत्पादन लागत पर बढ़ता दबाव
भारत में किसान खेती-किसानी के लिए डीजल पर काफी हद तक निर्भर हैं। सिंचाई, ट्रैक्टर और परिवहन जैसे कार्यों में डीजल का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में डीजल की कीमत बढ़ने से खेती की कुल लागत में सीधा इजाफा होता है।
Central Government increases petrol and diesel prices by ₹3 per litre and then gives a marginal MSP increase of just ₹72 per quintal on paddy. This is a direct assault on farmers’ incomes. By giving a token MSP hike and raising diesel prices the very next day, the @BJP4India…
— Adv Harpal Singh Cheema (@HarpalCheemaMLA) May 15, 2026
विशेषज्ञों का मानना है कि MSP का उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना है, लेकिन जब उत्पादन लागत ही बढ़ती जा रही हो, तो मामूली MSP वृद्धि का लाभ सीमित रह जाता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप
हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां किसानों के हितों के खिलाफ हैं। उनके अनुसार, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और MSP में नाममात्र वृद्धि का संयुक्त असर किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। वहीं, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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किसान हित नीतियों पर फिर शुरू हुई बहस
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर कृषि नीति, ईंधन मूल्य निर्धारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बहस को तेज कर दिया है। किसान संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से MSP को लागत के अनुरूप बढ़ाने की मांग लगातार की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि क्षेत्र को स्थिर और लाभकारी बनाए रखने के लिए ईंधन कीमतों और MSP नीतियों के बीच संतुलन आवश्यक है।