Pregnancy Care in Summer: गर्मी का मौसम जहां सामान्य लोगों के लिए असहजता बढ़ा देता है, वहीं प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यह समय और भी ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। शरीर में पहले से हो रहे हार्मोनल बदलाव और बढ़े हुए ब्लड सर्कुलेशन के कारण गर्मी का असर जल्दी और ज्यादा महसूस होता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
प्रेग्नेंसी में गर्मी का असर क्यों ज्यादा होता है
डॉक्टरों के अनुसार प्रेगनेंसी के दौरान शरीर का तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक होता है और ब्लड सर्कुलेशन भी तेज हो जाता है। जब बाहर का तापमान ज्यादा होता है, तो शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इसी वजह से शरीर जल्दी थक जाता है और कई तरह की समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
गर्मी में होने वाली सामान्य परेशानियां
तेज गर्मी में प्रेग्नेंट महिलाओं को डिहाइड्रेशन, कमजोरी, सिर दर्द, चक्कर आना और अत्यधिक थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा ज्यादा पसीना आना, बेचैनी महसूस होना और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव भी आम हो जाता है। लंबे समय तक धूप में रहने से यह स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों की संभावना
विशेषज्ञों के अनुसार अधिक गर्मी के कारण हीट एक्सॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने पर कमजोरी, उलझन, तेज सिर दर्द और यहां तक कि बेहोशी की स्थिति भी बन सकती है। कुछ मामलों में लगातार डिहाइड्रेशन से प्री-टर्म डिलीवरी और कम वजन वाले बच्चे के जन्म का खतरा भी बढ़ सकता है।
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गर्मी में कैसे रखें अपनी सेहत का ध्यान
गर्मी के मौसम में प्रेग्नेंट महिलाओं को अपनी लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे लेकिन जरूरी बदलाव करने चाहिए। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। नारियल पानी, छाछ और ताजे फलों के जूस जैसे हेल्दी लिक्विड डाइट में शामिल करने से शरीर को ठंडक और ऊर्जा मिलती है। संतुलित आहार जिसमें फल और सब्जियां शामिल हों, शरीर को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। दोपहर की तेज धूप से बचना और बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखना भी बेहद जरूरी है।
कपड़ों और दिनचर्या का सही चुनाव
गर्मी में हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है क्योंकि यह शरीर को हवा देता है और पसीना कम करता है। टाइट या सिंथेटिक कपड़े असहजता बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही दिनभर में छोटे-छोटे अंतराल पर हल्का भोजन लेना शरीर को लगातार ऊर्जा देता है और ज्यादा थकान से बचाता है। तला-भुना और ज्यादा मसालेदार भोजन कम करना बेहतर होता है ताकि शरीर पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
कब जरूरी है डॉक्टर से संपर्क करना
अगर किसी भी प्रेग्नेंट महिला को बार-बार चक्कर आना, तेज सिर दर्द, लगातार उल्टी, अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसी स्थिति महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है। नियमित प्रेगनेंसी चेकअप भी बहुत महत्वपूर्ण है ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।