आम आदमी पार्टी की 108 टीमें बनी हैं और तालुका में 100 लोगों की टीम होगी, गांव की भी अलग-अलग टीमें बनाई जाएंगी: इसुदान गढ़वी
आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष और किसान नेता इसुदान गढ़वी ने खंभालिया में मीडिया के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि, दुष्काल घोषणा सत्याग्रह जो पांच दिनों से चल रहा है, उस मुद्दे पर आगे हम आज प्लान B घोषित करने जा रहे हैं। अब यह सत्याग्रह 108 अकालग्रस्त तालुकाओं के सैकड़ों गांवों में जाएगा, हमारी 108 टीमें बनी हैं और तालुका की 100 लोगों की टीम है, और साथ-साथ गांव की भी अलग टीम बनेगी। गांव की टीम गांव में सत्याग्रह करेगी क्योंकि वे कहते थे कि “आप गांव में आइए”। हमें लोग साबरकांठा, कच्छ सहित कई जिलों में बुला रहे हैं तो हमारी टीमें वहां जाएंगी। इन प्रत्येक बैठकों में हमारी टीमें किसानों से अकाल का आवेदन भरवाएंगी। हम 1 अक्टूबर तक ये आवेदन भरवाएंगे और 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जी की जन्म जयंती के दिन गांधीनगर में “चलो गांधीनगर” के नारे के साथ सत्याग्रह होगा। इसके बाद किसानों द्वारा किए गए लाखों हस्ताक्षरों की पोटली सरकार के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। हम सरकार से कहेंगे कि ये लाखों किसानों और पशुपालकों के आवेदन हैं तो उन्हें आप उचित न्याय और मुआवजा दें।
आगे आम आदमी पार्टी के किसान नेता इसुदान गढ़वी ने कहा कि, हम सभी नेता और पदाधिकारी, यानी सभी लोग गांवों में जाएंगे, बैठकें करेंगे और मैं भी लगभग सभी अकालग्रस्त जिलों में पहुंचूंगा। सरकार ऐसे भी नाटक करती है कि सैटेलाइट सर्वे करेगी, यह सर्वे करेगी, वह सर्वे करेगी, तब हम यह दिखाएंगे कि किसानों ने पहले से ही फॉर्म भरे हुए हैं और जिन किसानों ने फॉर्म भरा होगा, उन्हें राहत मिले, यह हम सभी का कर्तव्य है। इसलिए हम सरकार के समक्ष लाखों फॉर्म रखकर अपनी बात रखेंगे। किसानों के खातों में जब तक सहायता की राशि नहीं आएगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्लान B के बाद भी हम सरकार को अल्टीमेटम देंगे और सरकार दुष्काल घोषित नहीं करेगी तो फिर हम प्लान C घोषित करेंगे।
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दुष्काल घोषणा सत्याग्रह में आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री मनोज सौरठिया ने कहा कि, यह सरकार कब जागेगी? कोई आत्महत्या कर ले तब जागेगी? ऐसा कुछ न हो इसलिए हम अभी सत्याग्रह पर बैठे हैं। हमारी यही मांग है कि सिर्फ दुष्काल तो घोषित करो ताकि किसानों और पशुपालकों के लिए राहत के कदम उठाए जा सकें। सत्ता में बैठे लोगों की भगवान परीक्षा ले रहे हैं। 30 साल पहले किसानों के वोट से जीतने वाली यह भारतीय जनता पार्टी अब वह नहीं रही। आज ऐसे लोग सत्ता में बैठे हैं जिनका काम सिर्फ व्यापार करना है। इन लोगों को जनता की समस्या में कोई रुचि नहीं है, वे सिर्फ टेंडर में या पांच पैसे की आमदनी में अपना घर भरने के काम में लगे हुए हैं। यह सत्याग्रह सिर्फ दुष्काल घोषित कराने का नहीं बल्कि किसान विरोधी भाजपा के विरोध का सत्याग्रह है। कई मुद्दों से अब हम इस सरकार से थक चुके हैं, इसलिए आने वाले समय में हम सभी लोगों को एकजुट होना पड़ेगा और जाति-समुदाय भूलकर भाजपा को भगाने का काम करना पड़ेगा। आज अगर सभी समस्याओं का केंद्र कोई है तो वह भाजपा है। कहीं खंभे का आंदोलन चल रहा है, कहीं टीपी का आंदोलन चल रहा है, कहीं इको जोन का आंदोलन चल रहा है, हमें लाठियां खानी पड़ती हैं, जेल जाना पड़ता है। इतने आंदोलनों की तो अंग्रेजों के समय भी लोगों को जरूरत नहीं पड़ी थी। अंग्रेज थोड़े पढ़े-लिखे थे लेकिन अभी तो ये अनपढ़ लोग हैं और इन्हें भारत के विकास में रुचि नहीं है, लोगों की पीड़ाओं में रुचि नहीं है, इन्हें सिर्फ अपनी सत्ता बनाए रखने में रुचि है। जब तक हम इन लोगों को सत्ता से बाहर नहीं करेंगे, तब तक इस देश का भला नहीं होगा।
दुष्काल घोषणा सत्याग्रह में आम आदमी पार्टी की प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष पायल साकरिया ने कहा कि, इसुदानभाई गढ़वी ने टीवी के माध्यम से भी गांव-गांव के मुद्दे उठाए थे। जब कोई भी व्यक्ति समाजसेवा करने का निर्णय लेता है तो वह राजनीति में जुड़ता है। गुजरात में तो किस तरह रुपये कमाने हैं, अपनी फैक्ट्रियां चलानी हैं, अपने करीबियों के काम करवाने हैं, बस यही राजनीति हो गई है, तो इसे बदलेगा कौन? इसुदानभाई इसलिए सत्याग्रह कर रहे हैं क्योंकि सरकार दुष्काल घोषित नहीं करती। हर बार हमें आंदोलन ही क्यों करना पड़ता है? चुनाव आते समय ये नेता लोगों के पैर पड़ते हैं लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद लोगों की तरफ देखते तक नहीं हैं। अपने हक के लिए आज किसान धूप में बैठे हैं लेकिन वोट लेकर वे लोग एसी चैंबर में बैठे हैं। जीतने के बाद अपनी सात पीढ़ियों को किस तरह आगे ले जाना है, यह काम भाजपा के जीते हुए विधायक करते हैं। द्वारका के विधायक ने 115 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी। तीस साल में किसान समृद्ध क्यों नहीं हुए? क्यों किसानों, युवाओं और छात्रों को आंदोलन करना पड़ता है? क्या आंदोलन करने के लिए हम उन्हें वोट देते हैं? किसान अच्छे भाव की उम्मीद में पूरे साल मेहनत करते हैं और बाजार में जाते हैं तो पता चलता है कि पिछली बार की तुलना में भी फसल का कम भाव मिल रहा है।