अरविंद केजरीवाल ने पेपर लीक रोकने के लिए सरकार के कदमों और टेलीग्राम पर लगे अस्थायी प्रतिबंध को लेकर सवाल उठाए। एनटीए के फैसले पर भी बहस तेज हुई।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने परीक्षा पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की आलोचना की है। उन्होंने विशेष रूप से टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर लगाए गए अस्थायी और सीमित अवधि के प्रतिबंध को लेकर सवाल खड़े किए।
सरकार के कदमों को बताया “बेतुका”
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार के ये कदम पेपर लीक रोकने के वास्तविक उद्देश्य को पूरा नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि दस्तावेज़ों के लीक को रोकने के नाम पर उठाए जा रहे फैसले व्यावहारिक नहीं हैं और इससे वास्तविक समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सेना के माध्यम से दस्तावेजों के परिवहन या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदमों से पेपर लीक को रोकना संभव नहीं है।
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पेपर लीक और सिस्टम पर गंभीर आरोप
अपने बयान में केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पेपर लीक एक बड़े स्तर का संगठित रैकेट है, जिसमें भारी मात्रा में धन का लेनदेन शामिल है। उन्होंने दावा किया कि यदि पेपर लीक की समस्या खत्म हो जाती है तो राजनीतिक और अन्य स्तरों पर होने वाले वित्तीय प्रभावों पर भी असर पड़ेगा।
टेलीग्राम प्रतिबंध और एनटीए का निर्णय
यह मामला उस समय सामने आया जब राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने भारत में टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर 22 जून 2026 तक सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध लगाया। यह निर्णय NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं और पेपर लीक से संबंधित घटनाओं के बाद लिया गया था।
मोदी सरकार की पेपर लीक रोकने की नीयत ही नहीं है। इसलिए इस तरह के बेतुके कदम उठाये जा रहे हैं। सेना के जहाज़ों से पेपर ट्रांसपोर्ट करना, टेलीग्राम बंद करना। क्या इन कदमों से पेपर लीक बंद होंगे? बिल्कुल नहीं।
पेपर लीक का धंधा अरबों का धंधा है। पैसा टॉप तक जाता है। पेपर लीक बंद कर… https://t.co/skWpWOBocY
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) June 17, 2026
एनटीए के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या लीक को रोका जा सके।
टेलीग्राम की प्रतिक्रिया
वहीं टेलीग्राम के सीईओ पावेल ड्यूरोव ने इस प्रतिबंध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे लाखों सामान्य उपयोगकर्ता प्रभावित होते हैं और इससे समस्या का वास्तविक समाधान नहीं होता, क्योंकि लीक अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी फैल जाते हैं।
कानूनी और तकनीकी पहलू
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत की गई है। साथ ही, प्लेटफॉर्म से संदेश संपादन जैसी सुविधाओं को भी सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि परीक्षा से जुड़े किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोका जा सके।
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और तकनीकी हलकों में बहस तेज हो गई है कि क्या ऐसे प्रतिबंध वास्तव में पेपर लीक जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान हो सकते हैं।