Hepatitis Risk: हेपेटाइटिस संक्रमण बिना लक्षण लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। जानें हेपेटाइटिस बी और सी का खतरा, जांच का सही समय और बचाव के आसान उपाय।
Hepatitis Risk: हेपेटाइटिस एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो धीरे-धीरे लिवर को प्रभावित कर सकता है। कई मामलों में शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते, जिसके कारण संक्रमण लंबे समय तक शरीर में बना रह सकता है और लिवर को नुकसान पहुंचाता रहता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण गंभीर स्थिति में लिवर में फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। समय पर जांच और इलाज से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर में लाखों लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस से प्रभावित हैं और हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत वायरल हेपेटाइटिस से जुड़ी जटिलताओं के कारण होती है।
क्या है हेपेटाइटिस संक्रमण?
हेपेटाइटिस में वायरस के कारण लिवर की कोशिकाओं में सूजन और संक्रमण हो जाता है। हेपेटाइटिस वायरस के कई प्रकार होते हैं, जिनमें हेपेटाइटिस A, B, C, D और E प्रमुख हैं। इनमें हेपेटाइटिस बी और सी को ज्यादा गंभीर माना जाता है, क्योंकि ये लंबे समय तक शरीर में रहकर लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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किन लोगों को हेपेटाइटिस का खतरा ज्यादा होता है?
कुछ लोगों में हेपेटाइटिस संक्रमण का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है। इनमें शामिल हैं:
- डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले लोग
- डायलिसिस कराने वाले मरीज
- इंजेक्शन के जरिए नशीले पदार्थ लेने वाले लोग
- असुरक्षित यौन संबंध बनाने वाले व्यक्ति
- संक्रमित मां से जन्म लेने वाले बच्चे
- पहले से लिवर संबंधी बीमारी से पीड़ित लोग
- इन लोगों को समय-समय पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच करवानी चाहिए।
हेपेटाइटिस की जांच कब करानी चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल लक्षण आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति में संक्रमण का खतरा अधिक है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर स्क्रीनिंग कराना बेहतर होता है।
इन परिस्थितियों में हेपेटाइटिस जांच जरूरी हो सकती है:
- लगातार थकान महसूस होना
- बार-बार मतली या कमजोरी होना
- पेट में दर्द या असहजता रहना
- त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया)
- संक्रमित रक्त चढ़ने की स्थिति
- संक्रमित सुई के संपर्क में आने पर
- असुरक्षित यौन संबंध के बाद
- गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर की सलाह पर
हेपेटाइटिस से बचाव के उपाय
हेपेटाइटिस से बचाव के लिए सावधानी और टीकाकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हेपेटाइटिस A और B से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध हैं।
बचाव के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- हमेशा साफ और सुरक्षित पानी का सेवन करें
- भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाएं
- नियमित रूप से हाथ धोने की आदत रखें
- रेजर, टूथब्रश और अन्य निजी सामान साझा न करें
- सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाएं
- शराब के सेवन से बचें, क्योंकि यह लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है
समय पर जांच से बच सकती है लिवर की गंभीर बीमारी
हेपेटाइटिस संक्रमण कई बार बिना किसी संकेत के शरीर में बढ़ता रहता है। ऐसे में समय पर जांच, सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव लिवर को गंभीर नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं।
अगर आप जोखिम वाले समूह में आते हैं या कोई संदिग्ध लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर उचित जांच जरूर कराएं।