Gum Disease: मसूड़ों से बार-बार खून आना मसूड़ों की बीमारी का संकेत हो सकता है। जानें मसूड़ों की बीमारी और हार्ट हेल्थ के बीच संबंध और बचाव के आसान तरीके।
Gum Disease: ब्रश करते समय अगर आपके मसूड़ों से बार-बार खून आता है, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। मसूड़ों से खून आना अक्सर गम डिजीज यानी मसूड़ों की बीमारी का संकेत हो सकता है। रिसर्च में मसूड़ों की बीमारी और हृदय संबंधी समस्याओं के बीच संबंध सामने आया है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि गम डिजीज सीधे तौर पर हार्ट अटैक का कारण बनती है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने 2025 में जारी वैज्ञानिक बयान में बताया कि पीरियोडोंटल डिजीज और एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवस्कुलर डिजीज के बीच संबंध को लेकर नए प्रमाण सामने आए हैं। इनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक, एट्रियल फिब्रिलेशन और हार्ट फेलियर जैसी स्थितियों के साथ संबंध भी शामिल है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार अभी कारण और प्रभाव को पूरी तरह साबित करने के लिए और रिसर्च की जरूरत है।
मसूड़ों की बीमारी क्या होती है?
मसूड़ों की बीमारी मुख्य रूप से दांतों के आसपास मौजूद मसूड़ों और उन्हें सहारा देने वाले ऊतकों में संक्रमण और सूजन से जुड़ी होती है। इसका शुरुआती रूप जिंजिवाइटिस है, जिसमें मसूड़े लाल, सूजे हुए और आसानी से खून करने वाले हो सकते हैं।
अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह आगे बढ़कर पीरियोडोंटाइटिस का रूप ले सकती है। इसमें दांतों को सहारा देने वाली हड्डी और ऊतक प्रभावित हो सकते हैं।
मसूड़ों और दिल के बीच क्या है संबंध?
मसूड़ों की गंभीर बीमारी में मुंह के अंदर लंबे समय तक सूजन और संक्रमण बना रह सकता है। वैज्ञानिकों ने ऐसे संभावित जैविक रास्तों की पहचान की है जिनके जरिए मुंह के बैक्टीरिया और सूजन शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित कर सकते हैं।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, पीरियोडोंटल पॉकेट्स से बैक्टीरिया खून के प्रवाह में पहुंच सकते हैं और शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को सक्रिय कर सकते हैं। लगातार बनी रहने वाली सूजन रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले संभावित तंत्रों में से एक मानी जाती है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि गम डिजीज को हार्ट अटैक का सीधा कारण नहीं माना जा सकता। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण मुख्य रूप से दोनों स्थितियों के बीच संबंध दिखाते हैं और कारण-परिणाम को लेकर अभी शोध जारी है।
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मसूड़ों से खून आना किस बीमारी का संकेत हो सकता है?
अगर ब्रश या फ्लॉस करते समय कभी-कभार नहीं बल्कि बार-बार मसूड़ों से खून आता है, तो यह जिंजिवाइटिस या किसी अन्य मसूड़ों की समस्या का संकेत हो सकता है।
इसके अलावा इन लक्षणों पर भी ध्यान दें:
- मसूड़ों का लाल या सूज जाना
- मसूड़ों में दर्द या संवेदनशीलता
- दांतों को ब्रश करते समय खून आना
- मुंह से लगातार बदबू आना
- दांतों का ढीला होना
- मसूड़ों का दांतों से पीछे हटना
- चबाते समय परेशानी होना
इनमें से कोई लक्षण लगातार बना रहता है तो डेंटिस्ट से जांच करवाना बेहतर है।
मसूड़ों की बीमारी से बचने के लिए क्या करें?
मसूड़ों की बीमारी को रोकने के लिए रोजमर्रा की ओरल हाइजीन बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ स्वास्थ्य संस्थाओं के अनुसार दिन में दो बार फ्लोराइड टूथपेस्ट से ब्रश करना, रोजाना फ्लॉस करना और नियमित डेंटल चेकअप करवाना मददगार हो सकता है।
1. दिन में दो बार ब्रश करें
दांतों और मसूड़ों पर जमा प्लाक को हटाने के लिए नियमित रूप से ब्रश करना जरूरी है।
2. रोजाना फ्लॉस करें
फ्लॉस करने से दांतों के बीच फंसे भोजन और प्लाक को हटाने में मदद मिलती है, जहां टूथब्रश आसानी से नहीं पहुंच पाता।
3. नियमित डेंटल चेकअप करवाएं
कम से कम साल में एक बार डेंटिस्ट से दांतों और मसूड़ों की जांच करवाना उपयोगी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर इससे ज्यादा बार जांच की सलाह दे सकते हैं।
4. धूम्रपान से दूरी बनाएं
धूम्रपान गंभीर मसूड़ों की बीमारी के जोखिम से जुड़ा हुआ है और इससे मसूड़ों की बीमारी के इलाज का असर भी कम हो सकता है।
सिर्फ मुंह की सफाई से दिल की बीमारी से बचाव नहीं
मसूड़ों की अच्छी देखभाल करना जरूरी है, लेकिन इसे हृदय रोग से बचाव का अकेला उपाय नहीं माना जा सकता। दिल की सेहत के लिए ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना, डायबिटीज को मैनेज करना, संतुलित आहार लेना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और तंबाकू से बचना भी महत्वपूर्ण है।
इसलिए अगर मसूड़ों से लगातार खून आता है, तो इसे केवल छोटी दांतों की समस्या मानने के बजाय डेंटिस्ट से सलाह लेना बेहतर है। वहीं सीने में दर्द, सांस फूलना या हार्ट अटैक के अन्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।