Wednesday, July 22, 2026

Early Menopause: समय से पहले मेनोपॉज से महिलाओं में बढ़ता हार्ट डिजीज का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

by Neha
Early Menopause: समय से पहले मेनोपॉज से महिलाओं में बढ़ता हार्ट डिजीज का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

Early Menopause: समय से पहले मेनोपॉज से महिलाओं में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। नई स्टडी में 26 देशों के डेटा के आधार पर यह अहम खुलासा हुआ है।

Early Menopause: समय से पहले होने वाला मेनोपॉज महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। हाल ही में प्रकाशित एक शोध में सामने आया है कि जल्दी मेनोपॉज से हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसमें 26 देशों की 1.11 लाख से अधिक महिलाओं के डेटा का विश्लेषण किया गया। रिसर्च में पाया गया कि 40 से 44 वर्ष की उम्र में मेनोपॉज का अनुभव करने वाली महिलाओं में हृदय रोगों का खतरा सामान्य उम्र में मेनोपॉज होने वाली महिलाओं की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक होता है।

भारत की महिलाओं में चिंताजनक आंकड़े

अध्ययन में शामिल भारतीय महिलाओं के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। कुल 7,872 महिलाओं में से लगभग 18.4 प्रतिशत ने समय से पहले मेनोपॉज का अनुभव किया, जबकि 25.3 प्रतिशत महिलाओं में 40 से 44 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज शुरू हुआ। कुल मिलाकर 43.6 प्रतिशत महिलाओं में अर्ली या प्रीमैच्योर मेनोपॉज देखा गया।

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हार्मोनल बदलाव और दिल की सेहत पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, मेनोपॉज से पहले महिलाओं में मौजूद एस्ट्रोजन हार्मोन हृदय और रक्त वाहिकाओं को कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है। लेकिन मेनोपॉज के बाद यह सुरक्षा कम हो जाती है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा पुरुषों के बराबर पहुंच सकता है।

किन कारणों से बढ़ रहा है जोखिम

विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव, धूम्रपान, असंतुलित आहार, नींद की कमी, डायबिटीज और प्रदूषण जैसे कारण समय से पहले मेनोपॉज की बड़ी वजह बन रहे हैं। इसके अलावा सेकेंड हैंड स्मोकिंग भी इस जोखिम को बढ़ा सकती है। भारत जैसे देशों में पोषण की कमी, कम उम्र में विवाह और बार-बार गर्भधारण जैसी स्थितियां भी महिलाओं के हार्मोनल स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।

समय रहते जांच और जागरूकता जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि मेनोपॉज स्क्रीनिंग को नियमित स्वास्थ्य जांच में शामिल किया जाना चाहिए। इससे हार्ट रोग, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के जोखिम को समय रहते पहचाना जा सकता है और रोकथाम संभव हो सकती है।

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