Wednesday, September 2, 2026

इसुदान गढ़वी: कल की कैबिनेट में दुष्काल घोषित नहीं हुआ तो आंदोलन का दूसरा चरण शुरू होगा

by Neha
इसुदान गढ़वी: कल की कैबिनेट में दुष्काल घोषित नहीं हुआ तो आंदोलन का दूसरा चरण शुरू होगा

सरकार मदद करने के बजाय सरपंचों, अधिकारियों और पुलिस को धमका रही है: इसुदान गढ़वी

आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष और किसान नेता इसुदान गढ़वी जामखंभालिया में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, जिसका आज चौथा दिन था। मुख्य चार मांगों के साथ इसुदान गढ़वी धरने पर बैठे थे और उनके साथ-साथ हजारों किसान इस कार्यक्रम में जुड़े और अपना समर्थन दिया। फिलहाल सरकार ने दो जिलों में पानी छोड़ने का निर्णय लिया है, जिसे इस सत्याग्रह की एक आंशिक जीत कहा जा सकता है। जिसके कारण उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में सरकार सभी मांगें पूरी करेगी। इस कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी के साथ-साथ प्रदेश संगठन महामंत्री मनोज सोरठिया, विधायक गोपाल इटालिया, विधायक हेमंत खवा, किसान सेल के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण राम, युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बृजराज सोलंकी, प्रदेश संगठन मंत्री राजू बोरखतरिया और महिला नेता जिगीषा पटेल सहित बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। किसानों और आम आदमी पार्टी के सभी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखीं और अकालग्रस्त क्षेत्रों को दुष्कालग्रस्त घोषित करने की मांग की।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने खंभालिया में आयोजित ’दुष्काल घोषणा सत्याग्रह’ में मीडिया के समक्ष जामनगर, द्वारका और पोरबंदर सहित राज्य के अकालग्रस्त क्षेत्रों की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, आज जब प्रकृति साथ नहीं दे रही है, तब सरकार को किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से सरकार ने भी किसानों को आकाश और जमीन के बीच बेसहारा छोड़ दिया है। फिलहाल जामनगर, द्वारका और पोरबंदर जिले में लाखों एकड़ जमीन और लाखों किसानों की स्थिति बेहद खराब है, सत्याग्रह के चौथे दिन हजारों किसान स्वेच्छा से आंदोलन में जुड़ रहे हैं, फिर भी सरकार के पेट का पानी नहीं हिल रहा है। किसान कोई ऐशो-आराम की मांगें नहीं कर रहे हैं, केवल अपने हक के मुआवजे की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार किसानों को दुष्काल राहत देने के बजाय सरपंचों, कर्मचारियों, अधिकारियों और पुलिस को धमकाकर इस आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। फिलहाल खेतों में खरीफ की फसल पूरी तरह विफल हो गई है, बीज का नुकसान हुआ है और बोर-कुओं का पानी सूख रहा है, इसलिए रबी की बुवाई की भी कोई संभावना नहीं है। किसानों की जेब खाली है और वे कर्ज के पहाड़ तले दबे हुए हैं, फिर भी सत्ताधारी नेता इस मुद्दे को भटकाने और जातिवाद के बाड़े में बांटने के नापाक प्रयास कर रहे हैं। इसुदान गढ़वी ने सभी विधायकों को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री के समक्ष मांग रखने की अपील की है और सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर कल होने वाली कैबिनेट बैठक में राज्य को दुष्कालग्रस्त घोषित नहीं किया गया, तो वे दोपहर 2 बजे के बाद आंदोलन के दूसरे चरण की घोषणा करेंगे। अंत में उन्होंने सभी किसानों से भावुक अपील करते हुए कहा था कि, कोई भी किसान हिम्मत न हारे या निराश होकर कोई गलत कदम न उठाए; जब तक उनके शरीर में प्राण हैं, तब तक वे किसानों के खातों में हक का मुआवजा जमा होने तक लड़ते रहेंगे।

सत्याग्रह छावनी में मीडिया के समक्ष आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल इटालिया ने बताया कि, दक्षिण गुजरात को छोड़कर लगभग पूरे गुजरात में नगण्य या बहुत कम बारिश हुई है। जिसके कारण किसानों की फसल सूख रही है। किसान ने बीज, खाद, पानी, दवा, मजदूरी सभी का खर्च कर दिया है, अब अगर फसल सूख जाती है तो गुजरात भर के किसानों को करोड़ों का नुकसान होने की संभावना है, इसलिए सरकार दुष्काल घोषित करे और खेती करने वाले लोगों तथा भागीदारों, मजदूरों को सरकार मदद करे तो एक आर्थिक संकट को टाला जा सकता है। इसी मांग के साथ आम आदमी पार्टी के नेता और गुजरात भर के किसानों की आवाज उठाने वाले इसुदान गढ़वी ने ’दुष्काल घोषणा सत्याग्रह’ शुरू किया है। इस कार्यक्रम में बहुत बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहते हैं और अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। इसुदानभाई को जो सूखती हुई फसल दिखाई दे रही है, वह भाजपा के नेताओं को क्यों नहीं दिखाई देती? भाजपा के नेताओं को कंपनी, ग्रांट और टेंडर दिखाई देते हैं, इसलिए मैंने इस कार्यक्रम में यह भी कहा कि सिर्फ बारिश का ही नहीं बल्कि अच्छे नेताओं का भी दुष्काल पड़ा है। तो अब जनता को जागरूक होकर अच्छे व्यक्ति को वोट देना होगा। हमारी मुख्य मांगें हैं कि सरकार दुष्काल घोषित करे, किसानों, खेत मजदूरों और पशुपालकों को सरकार सहायता दे तो आने वाले संकट को टाला जा सकता है।

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आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री मनोज सोरठिया ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि, जब भी किसान, मजदूर, विद्यार्थी या व्यापारी विकट स्थिति और पीड़ा में होता है, तब हम जिसे 30 वर्षों से चुनकर सत्ता में बैठाते आए हैं, उस सरकार से उम्मीद लगाकर बैठते हैं और कलेक्टर के माध्यम से विनती करते हुए आवेदन-पत्र भेजते हैं, लेकिन द्वारका, जामनगर और पोरबंदर सहित पूरे राज्य में दुष्काल जैसी स्थिति होने के बावजूद भाजपा के चुने हुए विधायक, सांसद या पंचायत के सदस्य मौन धारण करके बैठे हैं। खेतों में फसल जल जाने से किसानों को हार्ट अटैक आने जैसी गंभीर स्थिति होने के बावजूद इन नेताओं को केवल सत्ता और पद प्यारे हैं, जनता की पीड़ा से उनका कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे अन्याय के खिलाफ न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए इसुदान गढ़वी ने भगवान द्वारकाधीश के चरणों में सत्याग्रह की शुरुआत की है, जिसे आज सोशल मीडिया के माध्यम से जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, भावनगर और उत्तर गुजरात सहित पूरे राज्य के किसान समर्थन दे रहे हैं। भाजपा के नेता देश को विश्वगुरु बताकर अपनी सड़कों को स्पेन जैसा बताते हुए वास्तविक समस्याओं को नकार रहे हैं; वे किसानों के दुख, सड़कों के गड्ढों या भाव की समस्या को मानने के लिए ही तैयार नहीं हैं। जब तक सरकार समस्या को स्वीकार नहीं करेगी, तब तक समाधान संभव नहीं है, इसलिए अगर हम एक होकर लड़ेंगे तो सरकार को झुकना ही पड़ेगा और दुष्काल घोषित करके मुआवजा तथा सिंचाई का पानी देने के लिए मजबूर करना पड़ेगा।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश फ्रंटल अध्यक्ष और किसान मोर्चा के अध्यक्ष प्रवीण राम ने किसानों की सभा को संबोधित करते हुए कहा कि, वर्तमान में राज्य के किसानों की स्थिति बेहद भयावह है। किसानों को न्याय दिलाने, राज्य में दुष्काल घोषित करने, फसल सहायता देने, चारे की व्यवस्था करने और बिजली बिल माफ करने जैसी उचित मांगों के साथ इसुदान गढ़वी पिछले चार दिनों से धरने पर बैठे हैं। उन्होंने बड़ी संख्या में उपस्थित किसानों, गोपाल इटालिया, मनोज सोरठिया और बृजराजसिंह सहित सभी नेताओं का आभार व्यक्त किया। द्वारकाधीश की पवित्र भूमि को याद करते हुए उन्होंने कहा कि, जब सुदामा के घर गरीबी और दुष्काल आया था, तब कालिया ठाकुर ने उनकी जानकारी के बिना भी तकलीफें दूर कर दी थीं; आज हम सभी यहां इतनी बड़ी संख्या में एकत्र हुए हैं कि द्वारकाधीश प्रसन्न होकर इस सरकार को सद्बुद्धि देंगे। उन्होंने सरकार को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि, “हम गुजरात के किसान हैं, फिलहाल शांति और प्रेम से पानी और दुष्काल घोषित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अगर सरकार नहीं मानेगी तो इस आंदोलन के माध्यम से नया इतिहास लिखना भी हमें आता है।” इस देश का इतिहास गवाह है कि जब किसान एक होकर लड़े हैं तब बड़ी शानो-शौकत वाली अंग्रेज सरकार को भी झुकना पड़ा था, इसलिए वर्तमान सत्ताधारियों को भी किसानों की मांगें जल्द से जल्द पूरी करनी ही पड़ेंगी।

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