हाई ब्लड शुगर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये सिर्फ शुगर नहीं है; यह आपके दिल पर भी प्रभाव डालता है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों में दिल की बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
डायबिटीज अक्सर शरीर में बढ़े हुए ब्लड शुगर का कारण होता है, लेकिन इसका प्रभाव सिर्फ डायबिटीज नहीं है। फोर्टिस हॉस्पिटल मानेसर में सीनियर कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ चोपड़ा ने बताया कि दिल और रक्त वाहिकाओं का स्वास्थ्य लंबे समय तक उच्च रक्तचाप से प्रभावित हो सकता है। दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए, ब्लड शुगर में होने वाले बदलावों को समय रहते पहचानना महत्वपूर्ण हो सकता है।
also read: अफवाह या सच: क्या अक्ल दाढ़ निकलने के बाद वास्तव में अक्ल…
डायबिटीज और हार्ट का कनेक्शन
2026 में प्रकाशित एक अध्ययन ने देखा कि कम उम्र में मधुमेह की शुरुआत और आगे चलकर हृदय रोग का जोखिम एक दूसरे से संबंधित हैं। इस अध्ययन में 4,931 आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। यह पता चला कि चालिस साल की उम्र से पहले डायबिटीज का पता चलने वाले लोगों में दिल की बीमारी का अधिक खतरा था। साथ ही, अध्ययन ने पाया कि कम उम्र से लंबे समय तक रक्त में अधिक शर्करा होने से हृदय संबंधी बीमारी के बढ़ते खतरे का संबंध था।
लंबे समय तक ब्लड शुगर में वृद्धि खतरनाक
इसका अर्थ है कि ब्लड शुगर रिपोर्ट को केवल उस समय की स्थिति से नहीं जोड़ना चाहिए। यह भी महत्वपूर्ण है कि ब्लड शुगर कब तक रहता है। लंबे समय तक अधिक शुगर शरीर में अन्य खतरनाक कारकों के साथ मिलकर दिल और रक्त वाहिकाओं पर प्रभाव डाल सकता है।
प्री-डायबिटिक भी सावधान रहें
डायबिटीज से पहले की स्थिति, या प्री-डायबिटीज भी नहीं भूलना चाहिए। 2026 में मधुमेह संबंधी चिकित्सकीय मानकों में प्री-डायबिटिक को दिल की बीमारी के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। ऐसी स्थिति में रक्तचाप, खून में फैट और अन्य हृदय संबंधी खतरों को तुरंत पकड़ना महत्वपूर्ण है।
डायबिटीज से ये बीमारियों का खतरा
डायबिटीज, मस्तिष्काघात और हृदय की क्षमता कमजोर होने का जोखिम बढ़ सकता है। यही कारण है कि ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना सिर्फ डायबिटीज की समस्याओं को रोकने के लिए आवश्यक नहीं है, बल्कि दिल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए भी आवश्यक है। हृदय पर पूरा खतरा सिर्फ खाली पेट की रक्त शर्करा देखकर नहीं देखा जा सकता। तीन महीने में खून में औसत शुगर लेवल, ब्लड प्रेशर, खून में फैट, वजन, धूम्रपान की आदत, गुर्दे का स्वास्थ्य और परिवार में हृदय रोग का इतिहास जैसे कई कारक को एक साथ देखना चाहिए।
युवा लोगों को सावधान रहना चाहिए
जोखिम की पहचान जितनी जल्दी होती है, उतना अधिक समय जोखिम को कम करने के लिए मिलता है। रक्त शर्करा के साथ हृदय संबंधी जोखिम को नियंत्रित करने में कुछ मदद मिल सकती है; इनमें संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, उचित वजन रखना और चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार शामिल हैं। यदि रक्तचाप बढ़ा है, तो इसे मधुमेह की भविष्यवाणी नहीं मानना चाहिए, खासकर युवा लोगों में। कम उम्र में खून में शुगर का स्तर बढ़ना आगे चलकर हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है। यही कारण है कि रक्त शर्करा में निरंतर असामान्य बदलाव पाए जाने पर समय पर जांच की आवश्यकता होती है। हार्ट की बीमारी वर्षों में धीरे-धीरे विकसित होती है। शुरूआती स्टेज में स्पष्ट लक्षण हमेशा दिखाई देने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। ऐसे में ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना दिल को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।