Friday, July 24, 2026

DELHI NEWS : कानून मंत्री कपिल मिश्रा को बड़ी राहत, एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक जारी रही।

by editor
DELHI NEWS : कानून मंत्री कपिल मिश्रा को बड़ी राहत, एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक जारी रही।

DELHI NEWS : 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे से जुड़े मामले में राउज एवेन्यू सेशंस कोर्ट ने दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा मजिस्ट्रेट कोर्ट के जांच आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई टाल दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 मई को होगी।

2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे से जुड़े मामले में राउज एवेन्यू स्थित सेशंस कोर्ट ने कानून मंत्री कपिल मिश्रा की उस याचिका पर सुनवाई टाल दी है, जिसमें उन्होंने मजिस्ट्रेट कोर्ट के जांच के आदेश को चुनौती दी थी। स्पेशल जज दिग्विनय सिंह ने अब अगली सुनवाई की तारीख 26 मई तय की है।

बुधवार, 7 मई को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि दो पक्षकारों के पते अधूरे होने के कारण उन्हें समन की कॉपी नहीं भेजी जा सकी। इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई 26 मई तक के लिए स्थगित कर दी। साथ ही मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जांच के दिए गए आदेश पर लगी रोक को अगले निर्देश तक बढ़ा दिया गया।

कपिल मिश्रा के खिलाफ जांच संबंधी आदेश

इससे पहले 9 अप्रैल को सेशंस कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के जांच आदेश पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया था। यह याचिका कपिल मिश्रा और दिल्ली पुलिस की ओर से दायर की गई थी। दरअसल, राउज एवेन्यू स्थित मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिल्ली दंगों में कथित संलिप्तता के मामले में कपिल मिश्रा के खिलाफ जांच का निर्देश दिया था। यह आदेश एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने दिया था।

एसएचओ के खिलाफ एफआईआर का आदेश
इससे पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने कपिल मिश्रा के मामले में लापरवाही बरतने को लेकर ज्योति नगर थाने के एसएचओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कहा था कि कपिल मिश्रा पर संज्ञेय आरोप हैं, जिनकी जांच जरूरी है, और दिल्ली पुलिस को इसकी जांच करने का आदेश दिया गया था।

जांच में चूक या आरोपों को दबाने की कोशिश
कोर्ट ने यह भी कहा था कि या तो जांच अधिकारी ने कपिल मिश्रा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की या फिर उसने जानबूझकर आरोपों को छुपाने का प्रयास किया। अदालत ने यह तर्क भी दिया कि चूंकि कपिल मिश्रा एक सार्वजनिक व्यक्ति हैं, इसलिए उनके खिलाफ और गहराई से जांच की जरूरत है, क्योंकि ऐसे लोग सीधे जनता की राय को प्रभावित करते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्ति से संविधान के दायरे में रहने की अपेक्षा की जाती है।

मूल याचिका का संदर्भ
यह पूरा मामला यमुना विहार निवासी मोहम्मद इलियास द्वारा दाखिल उस याचिका से जुड़ा है जिसमें उन्होंने कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस याचिका का विरोध करते हुए दावा किया था कि मिश्रा की दिल्ली दंगों में कोई भूमिका नहीं थी।

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