Delhi Jal Board ने जल प्रबंधन व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से नई जल नीति लागू कर दी है, जिसके तहत राजधानी को आठ अलग-अलग जल सेवा ज़ोन में विभाजित किया गया है। हर ज़ोन में एक निजी ऑपरेटर नियुक्त किया जाएगा, जो उस क्षेत्र में जल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क की देखरेख, रखरखाव और लीकेज की मरम्मत जैसे कार्यों की जिम्मेदारी संभालेगा।
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि इस योजना का उद्देश्य जल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक कुशल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, न कि जल सेवा का निजीकरण करना। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि पानी की दरें तय करना और बिलिंग की प्रक्रिया Delhi Jal Board के ही अधिकार क्षेत्र में बनी रहेगी। निजी कंपनियों को सिर्फ तकनीकी संचालन और मरम्मत की जिम्मेदारी दी जाएगी।
इस नई नीति की शुरुआत वजीराबाद ज़ोन से की जा रही है, जहां लगभग 31.6 लाख लोगों को कवर किया जाएगा। इस पायलट प्रोजेक्ट से प्राप्त अनुभवों के आधार पर इसे अन्य ज़ोन में भी विस्तार दिया जाएगा।
दिल्ली में फिलहाल लगभग 15,600 किलोमीटर लंबा जल वितरण नेटवर्क है, जिसमें से 2,800 किलोमीटर पाइपलाइनें 30 साल से अधिक पुरानी हैं। इससे बड़े पैमाने पर जल क्षति और लीकेज होती है। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली की कुल जल आपूर्ति का करीब 50% हिस्सा लीकेज, चोरी या बिना मीटर वाले कनेक्शनों के कारण बर्बाद हो जाता है।
सरकार का कहना है कि यह बदलाव इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि राजधानी की आबादी 2.15 करोड़ से अधिक है, लेकिन सिर्फ 29 लाख पंजीकृत जल कनेक्शन हैं। इससे न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि पानी की गुणवत्ता और दबाव पर भी असर पड़ रहा है।
नई नीति के जरिए सरकार का लक्ष्य 24×7 जल आपूर्ति सुनिश्चित करना, जल बोर्ड की कार्यकुशलता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।