Saturday, September 12, 2026

गोपाल इटालिया: पुलिस किराए पर देकर भाजपा सरकार ने २५ करोड़ की कमाई की

by editor
गोपाल इटालिया: पुलिस किराए पर देकर भाजपा सरकार ने २५ करोड़ की कमाई की

गोपाल इटालिया: पुलिस किराए पर देकर कमाए गए पैसों से ‘कमलम’ बनता है और उससे लोगों को डराया जाता है

गांधीनगर में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान प्रश्नोत्तरी के संबंध में मीडिया से बात करते हुए आम आदमी पार्टी के विसावदर के विधायक गोपाल इटालिया ने बताया कि, विधानसभा में मेरा एक अत्यंत महत्वपूर्ण सवाल था कि गुजरात सरकार पुलिस किराए पर देती है। टेंपो, घोड़ा, रिक्शा, साइकिल, गधा, गाय-भैंस, पानी या ट्रैक्टर किराए पर मिलते हैं, लेकिन गुजरात में तो पुलिस भी किराए पर मिलती है; वह भी केवल पैसे वाले लोगों को। मैंने कई बार सरकार से कहा कि मुझे भी एसपी किराए पर दे दो, जो किराया होगा वह मैं दे दूंगा। अगर किराए पर ही देना है तो कंपनी को दो या गोपाल इटालिया को, क्या फर्क पड़ता है? मुझे भी एक एसपी, डीवाईएसपी और चार कांस्टेबल किराए पर चाहिए। भाजपा सरकार ने पुलिस किराए पर देने का आंकड़ा सार्वजनिक किया है, जिसमें कच्छ से सत्रह करोड़ इक्कीस लाख सत्ताईस हजार छह सौ इक्कीस रुपये (१७,२१,२७,६२१) की कमाई हुई है और उसमें से भी सत्तावन लाख रुपये कंपनियों से लेना बाकी है। गृह मंत्री से पूछने पर उन्होंने स्वीकार किया कि यह नीति लागू है। सुरेंद्रनगर में सात करोड़ चार लाख रुपये में पुलिस किराए पर दी गई, जिसमें अभी दो करोड़ रुपये वसूलने बाकी हैं। दोनों जिले मिलाकर लगभग पच्चीस करोड़ रुपये की आय भाजपा सरकार ने पुलिस किराए पर देकर की है।

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गोपाल इटालिया ने आगे बताया कि यूनिफॉर्म और संविधान से मिली वर्दी की इज्जत उतारकर सरकार क्या साबित करना चाहती है? जिस पीएसआई या कांस्टेबल की बैरेट कैप पर चार सिंह वाला राष्ट्रचिह्न (अशोक स्तंभ) होता है, वह आदमी कंपनियों के यहां किराए पर जाकर ‘जी सर, जी सर’ करता है। बिजली के खंभे दबंगई से लगाने में भी पुलिस किराए पर दी जाती है। इस किराए से कमाए गए पैसों से कमलम बनता है और उससे लोगों को डराया जाता है। आज भाजपा की यह दुकान विधानसभा के माध्यम से खुलकर सामने आ गई है। गुजरात के नागरिकों से विनती है कि आज पुलिस को किराए पर देना शुरू किया है, कल कंपनियों को मामलतदार, कलेक्टर, डीडीओ, प्रांत अधिकारी या रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर भी एक सप्ताह के लिए किराए पर दिए जाएंगे, जो गौचर अपने नाम करवा लेंगे। कल कोई कंपनी बैंक मैनेजर को किराए पर ले जाकर पांच सौ करोड़ का लोन लेकर मैनेजर को वापस छोड़ देगी तो क्या करना है? इसलिए पुलिस ही नहीं, बल्कि कोई भी सरकारी अधिकारी किराए पर नहीं मिलना चाहिए। २०२७ में झाड़ू का बटन दबाकर इस कचरे को साफ करने की जरूरत है।

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