Friday, September 11, 2026

गोपाल इटालिया: जूनागढ़, अमरेली, भावनगर, गिर सोमनाथ, कच्छ और सूरत में छह-छह सप्ताह से बारिश नहीं हुई है

by editor
गोपाल इटालिया: जूनागढ़, अमरेली, भावनगर, गिर सोमनाथ, कच्छ और सूरत में छह-छह सप्ताह से बारिश नहीं हुई है

गोपाल इटालिया: वन विभाग के गोदामों में चारा सड़ रहा होने के बावजूद हिजरत करने वाले मालधारियों को चारा नहीं दिया जा रहा।

गांधीनगर में विधानसभा सत्र के अंतिम दिन आम आदमी पार्टी के विसावदर के विधायक गोपाल इटालिया ने मीडिया से बातचीत में बताया था कि, विधानसभा में सूखे को लेकर चर्चा के दौरान उन्होंने किसानों की बिगड़ती स्थिति का मुद्दा उठाया था। सरकार ने बारिश की मात्रा, जमीन की नमी और मौसम के पूर्वानुमान जैसे कई वैज्ञानिक पैरामीटर्स प्रस्तुत किए, लेकिन उन्होंने सरकार से सवाल किया था कि किसानों की पीड़ा मापने का कोई पैरामीटर सरकार के पास है या नहीं? खेतों में खड़ी फसल, मूंगफली, कपास, मूंग, मठ और सोयाबीन पानी के बिना सूख रहे हैं और पौधों के कुपोषित हो जाने के कारण अब बारिश या सिंचाई आए तो भी फसल विफल हो रही है। इस परिस्थिति में सरकार को तकनीकी नियम बताने के बजाय संवेदनशीलता दिखाकर तत्काल सूखा घोषित करना चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री विजयभाई रूपाणी के 2021 के परिपत्र का उल्लेख करते हुए कहा था कि, मानसून के दौरान लगातार चार सप्ताह बारिश न हो तो सूखा माना जाए, जबकि जूनागढ़, अमरेली, भावनगर, गिर सोमनाथ, कच्छ और सूरत जैसे जिलों में लगातार छह सप्ताह से बारिश नहीं हुई है। उन्होंने मांग की थी कि विजयभाई रूपाणी की ‘मुख्यमंत्री किसान सहायता योजना’ के अनुसार प्रति एकड़ ₹20,000 से ₹25,000 तक का मुआवजा दिया जाए।

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विधायक गोपाल इटालिया ने आगे बताया था कि, किसानों के साथ मालधारियों और खेत मजदूरों की स्थिति भी अत्यंत गंभीर हो गई है। पशुपालक अपने पशुओं को लेकर हिजरत करने के लिए मजबूर हो गए हैं, जबकि वन विभाग के गोदामों में चारा सड़ रहा होने के बावजूद मालधारियों को वितरित नहीं किया जा रहा है। रोज कमाकर रोज खाने वाले खेत मजदूरों की रोजी-रोटी छिन गई है, और सरकार सूखा मापने के यंत्र खोजने में समय बर्बाद कर रही है। सरकार ने विधानसभा में किसानों को समृद्ध बताया, इस संबंध में गोपाल इटालिया ने कहा था कि, चुनावी एफिडेविट में करोड़ों की संपत्ति दर्शाने वाले नेता ही समृद्ध हैं, गांव का सामान्य किसान नहीं; अगर किसान वास्तव में समृद्ध होता तो उसे फसल लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ती। सरकार एक तरफ हजारों करोड़ का लोन देने के दावे करती है और दूसरी तरफ किसानों को समृद्ध बताती है, जो परस्पर विरोधाभासी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से संवेदनशील बनकर किसानों, पशुपालकों और मजदूरों के लिए जल्द से जल्द सूखा राहत पैकेज घोषित करने का अनुरोध किया था। राजकोट के कॉरपोरेटरों ने उनके मानदेय में ₹15,000 की जगह ₹50,000 करने की मांग की है। कॉरपोरेटर जिस तरह देशसेवा का कार्य कर रहे हैं, उसे देखते हुए देशसेवा के लिए उन्हें पर्याप्त धन मिलना चाहिए। राष्ट्रभावना, राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक योगदान, अरुणोदय और अंत्योदय जैसे मूलभूत सिद्धांतों के साथ काम करने के लिए ₹15,000 का भत्ता कम पड़ता है। इसलिए राष्ट्र के उत्थान के कार्य निरंतर चलते रहें, इसके लिए राजकोट के कॉरपोरेटरों को जल्द से जल्द ₹50,000 दे देने चाहिए।

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