Wednesday, September 9, 2026

मध्य प्रदेश के उज्जैन में खड़े हनुमान जी का अनोखा चमत्कार आखिर क्यों नहीं छोड़ रहे अपनी जगह?

by editor
मध्य प्रदेश के उज्जैन में खड़े हनुमान जी का अनोखा चमत्कार आखिर क्यों नहीं छोड़ रहे अपनी जगह?

मध्य प्रदेश के उज्जैन में पिछले कई दिनों से सड़क पर खड़ी हनुमान की प्रतिमा को हटाने की कोशिश की जा रही है। प्रतिमा को हटाने के लिए जेसीबी, बुलडोजर जैसी बड़ी मशीने भी हनुमान जी की प्रतिमा के आगे धराशाही हो गई।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में सरकार ने सड़कों को चौड़ा करने के लिए राह में आने वाले घर और दुकानों पर लगातार बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। ऐसे में, पिछले कई दिनों से सड़क के बीचों-बीच खड़ी हनुमानजी की प्रतिमा को हटाने की कोशिश की जा रही है। प्रतिमा को हटाने के लिए कभी जेसीबी बुलाया गया, तो कभी बुलडोजर भी बुलवाया गया। लेकिन हनुमान जी की प्रतिमा खड़ी रह गई, हालांकि इतनी बड़ी मशीने भी उसके सामने धराशाही हो गईं।

प्रशासन द्वारा प्रतिमा को हटाने के प्रयास में आज चौबीस घंटे बीत चुके हैं। लेकिन  8 फीट की प्रतिमा एक इंच भी नहीं हिली। भक्त इसे एक चमत्कार मानते रहे हैं। वहीं, इस प्रतिमा को हटाने के प्रयास में प्रशासन थक चुका है। पुरातत्व विभाग और तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम अब प्रतिमा की जांच करेगी। क्योंकि प्रतिमा को बलपूर्वक हटाने की कोशिश से खंडित या क्षतिग्रस्त हो सकती है। स्थिति को देखते हुए, प्रशासन अब स्केनिंग करके पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस प्रतिमा के न हिलने के कारण का क्या हैं।

8 फीट ऊंची बजरंगबली की मूर्ति एक इंच भी नहीं हिली

वर्तमान में प्रशासन के लिए उज्जैन के सती गेट क्षेत्र में लगभग 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा एक बड़ी चुनौती बन गई है। मध्य प्रदेश सरकार एक तरफ सड़कों को चौड़ी करने के लिए काम कर रही है। दूसरी ओर, लोगों के घर और दुकाने हाथ से चली गई हैं। लेकिन वहां खड़ी हनुमान की प्रतिमा को कोई हिला नहीं पा रहा है।

लोग इसे चमत्कार मानते हैं और पूजा करते हैं। 8 फीट ऊंची बजरंगबली की प्रतिमा का न हिलना स्थानीय लोगों की श्रद्धा का विषय है। भक्तों का मानना है कि बजरंगबली को उनकी  इच्छा के बिना कोई नहीं हिला सकता, क्योंकि उनकी कृपा से एक पत्ता भी नहीं हिलता है। ऐसे में धार्मिक धरोहर और विकास कार्यों के बीच संतुलन का एक मुद्दा बन गया है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन को चुनौती दी

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के दौरान कंठाला चौराहा से छत्री चौक तक खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन पूरी तरह से थक चुके हैं। चार दिन बीत गए। लेकिन प्रतिमा वहीं है। मंदिर का गर्भगृह और भवन जेसीबी से गिरा दिया गया है। अब प्रतिमा पर कैनोपी टेंट लगा हुआ है।

मंदिर के बाहर स्थानीय लोगों ने चेतावनी भरा पोस्टर लगाया है। जिसमें प्रशसान को चुनौतीपूर्ण शब्दों का उपयोग करते हुए कहा गया है कि अगर प्रतिमा को क्षति या खंडित हुई तो सरकार इसकी जिम्मेदार होगी।

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चमत्कार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

खड़े हनुमान जी की प्रतिमा का चमत्कारी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वास्तव में, मंदिर को हटाने के दौरान वहां लगभग पच्चीस बंदर घरों की छतों पर पहुंचे और वहां चल रहे कौतूहल का नजारा देखने लगे। भक्त इस भावुक नजारा को देखते रहे। सभी श्रद्धालुओं ने प्रतिमा के स्थानांतरण से पहले दर्शन किए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी ने बताया कि प्रतिमा मालवा के बेसाल्ट पत्थर से बनी है। 1000 साल पहले, राजा भोज और परमार काल में इस पत्थर से प्रतिमा बनाई जाती थी। प्रतिमा पर सिंदूर होने के कारण मूल स्वरूप स्पष्ट नहीं है। इस प्रतिमा को सुरक्षित स्थानांतरित करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों की मदद लेनी चाहिए।

एएसआई की सलाह व जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई

प्रशासन ने प्रतिमा को हटाने की कार्रवाई रोक दी है और एसआई की सलाह और जांच के बाद आगे की कार्रवाई करना शुरू कर दिया है कि प्रितमा के एक इंच भी नहीं हिलने की वजह क्या है? यहाँ तक कि भारी क्रेन, जेसीबी और अन्य उपकरण भी इस प्रतिमा को हटाने में असफल रहे। प्रशासन ने अब जांच टीम को काम पर लगाया है क्योंकि प्रतिमा को क्षतिग्रस्त होने से भी बचाना है। ASI की सलाह और जांच के बाद ही अगली कार्रवाई की जाएगी। लेकिन प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए तब तक टेंट लगाया गया है।

आस्था बनाम विकास

मंदिर के पुजारी महेश पंडित ने कहा कि बाबा उन्हें इसी जगह रहने का संकेत दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक मंदिर 1857 की क्रांति से पहले का है। इसलिए इसे हटाने के बजाय इसी स्थान पर एक सुंदर मंदिर बनाया जाना चाहिए। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को पूरा करने के लिए प्रशासन सड़कों को बढ़ाता है। लेकिन आस्था, ऐतिहासिक विरासत और तकनीकी जटिलताएं इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बाधा बन रही हैं।

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