Pneumonia Vaccine: क्या आपकी उम्र 50 साल से ज्यादा है या बार-बार खांसी-जुकाम रहता है? जानिए निमोनिया वैक्सीन किसे लगवानी चाहिए, इसके फायदे, डोज और साइड इफेक्ट्स।
Pneumonia Vaccine: निमोनिया एक गंभीर फेफड़ों का संक्रमण है, जो बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर वैक्सीनेशन इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। ऐसे में 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों से जूझ रहे मरीजों के लिए निमोनिया वैक्सीन बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या है निमोनिया वैक्सीन?
निमोनिया से बचाव के लिए दी जाने वाली वैक्सीन को न्यूमोकोकल वैक्सीन कहा जाता है। यह वैक्सीन स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिए बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है। यही बैक्टीरिया निमोनिया के अलावा कान, साइनस और रक्त संक्रमण जैसी गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकता है।
हालांकि यह वैक्सीन हर प्रकार के निमोनिया को पूरी तरह नहीं रोकती, लेकिन संक्रमण की गंभीरता और उससे जुड़ी जटिलताओं के खतरे को कम करने में मदद करती है।
निमोनिया वैक्सीन के प्रकार
वर्तमान में न्यूमोकोकल वैक्सीन मुख्य रूप से दो श्रेणियों में उपलब्ध है।
न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCV)
न्यूमोकोकल पॉलीसैकराइड वैक्सीन (PPSV)
डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त वैक्सीन की सलाह देते हैं।
किन लोगों को लगवानी चाहिए यह वैक्सीन?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार निम्न लोगों को निमोनिया वैक्सीन लगवाने पर विचार करना चाहिए:
- 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के वयस्क
- 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग
- गंभीर या पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीज
- बार-बार श्वसन संक्रमण से परेशान व्यक्ति
इन बीमारियों में बढ़ जाता है निमोनिया का खतरा
कुछ स्वास्थ्य स्थितियां निमोनिया के जोखिम को काफी बढ़ा देती हैं। इनमें शामिल हैं:
- हृदय रोग
- मधुमेह (डायबिटीज)
- अस्थमा
- क्रॉनिक लिवर डिजीज
- सिकल सेल डिजीज
- क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD)
- एम्फायसीमा
इसके अलावा कीमोथेरेपी करा रहे मरीज, अंग प्रत्यारोपण करा चुके लोग और एचआईवी से प्रभावित व्यक्ति भी उच्च जोखिम वाले समूह में आते हैं।
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स्मोकिंग और शराब से भी बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है। इससे फेफड़ों में संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है और निमोनिया जैसी बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है।
क्या हर साल लगवानी पड़ती है निमोनिया वैक्सीन?
फ्लू वैक्सीन के विपरीत, निमोनिया वैक्सीन को हर साल लगवाने की आवश्यकता नहीं होती। अधिकांश लोगों को एक बार वैक्सीनेशन कराने के बाद लंबे समय तक सुरक्षा मिलती है।
हालांकि कुछ वरिष्ठ नागरिकों और विशेष स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीजों को अतिरिक्त डोज की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
बच्चों के लिए वैक्सीन शेड्यूल
बच्चों को यह वैक्सीन आमतौर पर चार चरणों में दी जाती है। इसके डोज 2 महीने, 4 महीने, 6 महीने और 12 से 15 महीने की उम्र में लगाए जाते हैं। यदि निर्धारित समय पर टीकाकरण नहीं हो पाया है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार बाद में भी डोज पूरी की जा सकती है।
क्या हैं इसके संभावित साइड इफेक्ट्स?
निमोनिया वैक्सीन को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। इसके कुछ सामान्य साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं:
- इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या सूजन
- हल्का बुखार
- थकान
- भूख में कमी
- मांसपेशियों में दर्द
गंभीर एलर्जी की प्रतिक्रिया बेहद दुर्लभ मानी जाती है।
डॉक्टर की सलाह क्यों है जरूरी?
हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल इतिहास अलग होता है। इसलिए निमोनिया वैक्सीन लगवाने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। सही समय पर लिया गया टीका गंभीर संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम कर सकता है।