जानिए कौन हैं सांवरिया सेठ, जिन्हें भक्त व्यापार का देवता और अपना बिजनेस पार्टनर मानते हैं। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित मंदिर की आस्था, मान्यता और चढ़ावे से जुड़ी पूरी कहानी।
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया गांव में स्थित सांवरिया सेठ मंदिर आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां भगवान श्रीकृष्ण के एक स्वरूप को ‘सांवरिया सेठ’ के रूप में पूजा जाता है, जिन्हें भक्त व्यापार और कारोबार का देवता मानते हैं।
व्यापारियों के बीच गहरी आस्था
देशभर के व्यापारी, खासकर राजस्थान और गुजरात से, सांवरिया सेठ को अपने व्यापार में साझेदार मानते हैं। कई व्यापारी अपनी आमदनी का एक निश्चित हिस्सा, लगभग 2% से 10% तक, भगवान को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से कारोबार में वृद्धि होती है और लाभ कई गुना बढ़ जाता है।
मंदिर में चढ़ावा और विदेशी मुद्रा
सांवरिया सेठ मंदिर में हर महीने दानपात्र खोला जाता है, जिसमें बड़ी मात्रा में चढ़ावा प्राप्त होता है। यहां तक कि विदेशी मुद्रा जैसे डॉलर, पाउंड, दिरहम और रियाल भी मिलते हैं, क्योंकि देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
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देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु
इस मंदिर की प्रसिद्धि केवल भारत तक सीमित नहीं है। विदेशों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं और अपनी आस्था के अनुसार भेंट और चढ़ावा अर्पित करते हैं। इसी वजह से यह मंदिर धार्मिक और आर्थिक आस्था दोनों का केंद्र बन गया है।
धार्मिक मान्यता और पौराणिक संबंध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सांवरिया सेठ का संबंध श्रीकृष्ण और सुदामा की कथा से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि जब सुदामा द्वारका पहुंचे थे, तब श्रीकृष्ण ने उनका अत्यंत प्रेमपूर्वक स्वागत किया था। इसी दिव्य स्वरूप को ‘सांवरिया सेठ’ के रूप में पूजा जाता है।
आस्था और व्यापार का अनोखा संगम
आज सांवरिया सेठ मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि व्यापारियों की आस्था का केंद्र भी बन चुका है। भक्त इसे अपने बिजनेस का हिस्सा मानते हैं और इसे समृद्धि का आशीर्वाद देने वाला देवता मानते हैं।