जेस्टेशनल डायबिटीज को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। प्रेग्नेंसी के बाद इसके कारण थायरॉयड, हार्ट डिजीज और डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। जानें जरूरी लक्षण और बचाव के तरीके।
जेस्टेशनल डायबिटीज यानी गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज को अक्सर अस्थायी समस्या माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसका असर डिलीवरी के बाद भी लंबे समय तक शरीर पर बना रह सकता है। डिलीवरी के बाद ब्लड शुगर सामान्य हो सकता है, लेकिन शरीर में मेटाबॉलिक बदलाव जारी रह सकते हैं।
डिलीवरी के बाद लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
प्रसव के बाद ज्यादातर महिलाएं अपने बच्चे की देखभाल में व्यस्त हो जाती हैं और अपनी सेहत पर ध्यान नहीं देतीं। थकान, बाल झड़ना, वजन बढ़ना, मूड स्विंग्स और लगातार कमजोरी जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ये संकेत कई बार थायरॉयड डिसफंक्शन या हार्मोनल असंतुलन की ओर इशारा कर सकते हैं।
also read: नोरोवायरस: उल्टी, दस्त और पेट दर्द से बिगड़ सकती है…
जेस्टेशनल डायबिटीज और थायरॉयड के बीच संबंध
विशेषज्ञों के अनुसार जेस्टेशनल डायबिटीज केवल गर्भावस्था तक सीमित नहीं रहती। इसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो आगे चलकर थायरॉयड, हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकते हैं।
थायरॉयड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्ट रेट, शरीर के तापमान और ऊर्जा स्तर को नियंत्रित करती है। इसमें गड़बड़ी होने पर पूरे शरीर पर असर पड़ता है।
शोध और मेडिकल रिपोर्ट क्या कहती हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठनों और मेडिकल रिसर्च में पाया गया है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस और थायरॉयड डिसफंक्शन के बीच संबंध हो सकता है। हालांकि इस पर अभी और अध्ययन जारी हैं, लेकिन जेस्टेशनल डायबिटीज का इतिहास रखने वाली महिलाओं में आगे चलकर मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा अधिक देखा गया है।
किन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
थायरॉयड की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और इसके लक्षण आसानी से नजर नहीं आते। लगातार थकान, बिना कारण वजन बढ़ना, बाल झड़ना, ड्राई स्किन, एंग्जायटी, डिप्रेशन, ठंड ज्यादा लगना, अनियमित पीरियड्स और ध्यान लगाने में कठिनाई इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं।
नियमित जांच क्यों जरूरी है?
डॉक्टर सलाह देते हैं कि जिन महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज रही हो, उन्हें समय-समय पर ब्लड शुगर और थायरॉयड टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। अगर परिवार में डायबिटीज या थायरॉयड का इतिहास हो तो जोखिम और बढ़ जाता है।