Saturday, April 18, 2026

Winter Sleep Cycle: गर्मी की बजाय सर्दियों में ज्यादा क्यों आती है नींद? जानें विंटर में स्लीप साइकिल कैसे काम करती है

by Neha
Winter Sleep Cycle: गर्मी की बजाय सर्दियों में ज्यादा क्यों आती है नींद? जानें विंटर में स्लीप साइकिल कैसे काम करती है

Winter Sleep Cycle: सर्दियों में ज्यादा नींद क्यों आती है? जानें विंटर में स्लीप साइकिल कैसे काम करती है, मेलाटोनिन और सेरोटोनिन का असर, और क्यों ठंड में नींद लेना शरीर की नेचुरल जरूरत है।

Winter Sleep Cycle: सर्दियों में अक्सर ऐसा महसूस होता है कि नींद ज्यादा आने लगी है और सुबह उठना मुश्किल हो रहा है। कई लोग इसे आलस समझ लेते हैं, लेकिन असल में इसके पीछे एक नेचुरल और साइंटिफिक प्रक्रिया काम करती है। हमारे शरीर की नींद की जरूरत मौसम और दिन की लंबाई के अनुसार बदलती रहती है। खासतौर पर ठंड के मौसम में स्लीप साइकिल और शरीर की बायोलॉजिकल घड़ी में बदलाव होने लगता है, जिससे नींद अधिक आती है।

सर्दियों में नींद क्यों बढ़ जाती है?

सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं। सूरज देर से उगता है और जल्दी ढल जाता है, जिससे शरीर को पर्याप्त रोशनी नहीं मिलती। रोशनी की कमी सीधे मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है। मेलाटोनिन वह हार्मोन है जो शरीर को सोने का संकेत देता है। जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ता है, मेलाटोनिन का स्तर भी बढ़ता है और नींद जल्दी आने लगती है।

इसके अलावा, धूप कम मिलने से सेरोटोनिन हार्मोन का स्तर घट जाता है। सेरोटोनिन मूड और एक्टिविटी से जुड़ा होता है। इसका स्तर घटने पर सुस्ती और थकान बढ़ती है, जिससे अधिक समय तक बिस्तर में रहना स्वाभाविक लगता है।

also read: Dark Skin and Diabetes: क्या आपकी त्वचा का कालापन…

सर्दियों में नींद ज्यादा आना आलस नहीं है

ठंड के मौसम में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और शरीर ऊर्जा बचाने के लिए खुद को गर्म रखने की कोशिश करता है। इस दौरान स्लीप साइकिल बदल जाती है और नींद का समय बढ़ जाता है। इसलिए सर्दियों में ज्यादा सोना शरीर की नेचुरल जरूरत है, आलस नहीं।

सीजनल बायोलॉजिकल रिदम कैसे काम करती है?

हमारे शरीर में एक आंतरिक घड़ी होती है जिसे बायोलॉजिकल रिदम कहा जाता है। यह दिन-रात की लंबाई और मौसम के अनुसार काम करती है। सर्दियों में यह रिदम धीमी हो जाती है क्योंकि रोशनी कम होती है। इसके चलते नींद लंबी और गहरी हो सकती है।

गर्मियों में दिन लंबे होने के कारण बायोलॉजिकल रिदम तेज हो जाती है और नींद की जरूरत कम महसूस होती है। सर्दियों में अंधेरा जल्दी होने से दिमाग को संकेत मिलता है कि आराम का समय बढ़ गया है, जिससे मेलाटोनिन का स्तर अधिक समय तक बना रहता है। ठंड में शरीर की एक्टिविटी भी कम हो जाती है, जिससे थकान और सुस्ती बढ़ती है।

You may also like

कंगना रनौत ने चिराग पासवान संग रिश्ते पर तोड़ी चुप्पी, कहा– ‘होता तो बच्चे होते! इंटरफेथ शादी पर बवाल: ट्रोलिंग से टूटी कनिका, वीडियो में छलका दर्द ,बोलीं—“असली सनातनी बनो” 44 की उम्र में दुल्हन बनेंगी अनुषा दांडेकर?, ‘Save the Date’ ने मचाया तहलका 40 की उम्र में सिंगल, प्यार में मिला धोखा, नहीं बनना चाहतीं मां, शक्ति मोहन का चौंकाने वाला फैसला सुरों की मलिका Asha Bhosle का निधन, 92 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा