पश्चिम बंगाल चुनाव रुझानों में बड़ा बदलाव, भाजपा को बहुमत की ओर बढ़त और तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में सेंध। ताज़ा सीट अपडेट और राजनीतिक स्थिति।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के ताज़ा रुझानों में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है। राज्य की सत्ता पर लंबे समय से काबिज तृणमूल कांग्रेस (TMC) को इस बार कड़ी चुनौती मिलती नजर आ रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) मजबूत बढ़त के साथ सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है।
चुनाव आयोग से प्राप्त शुरुआती रुझानों के अनुसार, 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा करीब 121 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस लगभग 71 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं उसकी सहयोगी पार्टी बीजीपीएम एक सीट पर आगे बताई जा रही है। कई राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में भी भाजपा को बढ़त मिलती दिखाई गई है, जहां अनुमानित रूप से पार्टी 148 के बहुमत आंकड़े को पार करती नजर आ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार के चुनाव में मुकाबला बेहद कड़ा रहा है। शुरुआती रुझानों में भाजपा को करीब 160 सीटों तक बढ़त मिलने की संभावना भी जताई जा रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस लगभग 121 सीटों पर सिमटती दिख रही है।
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इस बीच भाजपा नेता और नंदीग्राम तथा भवानीपुर से उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने अपनी पार्टी की बढ़त पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती आंकड़ों में भाजपा मजबूत स्थिति में है और सत्ता परिवर्तन की संभावना प्रबल दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस बार कई क्षेत्रों में वोटिंग पैटर्न में बदलाव देखने को मिला है, जिससे राजनीतिक समीकरण प्रभावित हुए हैं।
अधिकारी के अनुसार, कुछ इलाकों में मतदान के रुझानों में अंतर देखा गया है और कई क्षेत्रों में पहले के मुकाबले वोट प्रतिशत में बदलाव हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार विपक्ष विरोधी लहर और राजनीतिक ध्रुवीकरण का असर चुनाव परिणामों पर दिख सकता है।
चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में मतदान प्रतिशत भी काफी ऊंचा दर्ज किया गया है। दूसरे चरण में मतदान 91 प्रतिशत से अधिक रहा, जबकि पहले चरण में यह 93 प्रतिशत से ज्यादा रहा, जिससे कुल मतदान प्रतिशत ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया।
वहीं यदि 2021 के विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो उस समय तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटों के साथ बड़ी जीत हासिल की थी। भाजपा उस चुनाव में 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी। उस समय भी भाजपा ने राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने में सफलता पाई थी, लेकिन बहुमत से काफी दूर रह गई थी।
ताज़ा रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और मुकाबला काफी हद तक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।