राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में सामान्य वस्तुएं भी हथियार बन सकती हैं और तकनीकी बदलाव युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है।
आधुनिक युद्ध में तेजी से हो रहा बदलाव
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने वैश्विक संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि युद्ध अब पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकल चुका है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ ही वर्षों में इस संघर्ष का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है—जहां पहले टैंक और मिसाइल जैसे पारंपरिक हथियार प्रमुख थे, वहीं अब ड्रोन और सेंसर तकनीक युद्ध के केंद्र में आ गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी बदलाव की गति इतनी तेज है कि आज युद्ध के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं, जिनकी पहले कल्पना करना भी मुश्किल था।
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पेजर विस्फोटों का उदाहरण
रक्षा मंत्री ने हाल ही में लेबनान और सीरिया में हुए कथित पेजर विस्फोटों का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है। उन्होंने कहा कि एक साधारण संचार उपकरण भी घातक हथियार में बदल सकता है।
उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं यह साबित करती हैं कि अब यह अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है कि कौन सी वस्तु कब और कैसे हथियार का रूप ले सकती है।
भारत के लिए तैयारियों का महत्व
राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि इस बदलते सुरक्षा परिदृश्य में भारत जैसे देशों के लिए तैयार रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीक, उद्योग और सैन्य क्षमता का एकीकरण बेहद जरूरी है।
नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का उद्देश्य
यह कार्यक्रम “डिफेंस ट्रायड” की अवधारणा पर आधारित था, जिसमें तकनीक, उद्योग और सैन्य कौशल के समन्वय को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तीन दिवसीय आयोजन में 284 कंपनियां स्वदेशी रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन कर रही हैं, जिससे आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली को मजबूती मिल सके।