कम उम्र में बढ़ रहा Blindness का खतरा, जानिए इसकी वजहें

कम उम्र में बढ़ रहा Blindness का खतरा, जानिए इसकी वजहें

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कम उम्र में Blindness का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, खासकर कॉर्नियल ब्लाइंडनेस के मामलों में, जिसे पहले सिर्फ बुजुर्गों की समस्या माना जाता था। इंडियन सोसाइटी ऑफ कॉर्निया एंड केराटो-रिफ्रैक्टिव सर्जन्स (ISCKRS) के 2025 राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि अब 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में यह समस्या तेजी से फैल रही है। हर साल 20 से 25 हजार नए केस सामने आते हैं, जिनमें अधिकांश युवा होते हैं। मामूली चोट, संक्रमण या जलन को नज़रअंदाज करना कई बार स्थायी अंधेपन का कारण बन जाता है, जबकि समय पर इलाज से इसे रोका जा सकता है।

इस बीमारी के पीछे मुख्य वजहें हैं—आंखों में चोट, संक्रमण, पोषण की कमी (खासकर विटामिन A), समय पर जांच न होना और जागरूकता की कमी। ग्रामीण इलाकों और फैक्ट्रियों में काम करने वाले युवाओं में यह खतरा ज्यादा है, जहां घरेलू नुस्खों पर भरोसा करने से स्थिति बिगड़ जाती है।

भारत में हर साल लगभग 1 लाख कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन केवल 40,000 ही हो पाते हैं। डोनर की कमी, प्रशिक्षित सर्जनों की कमी और नेत्र बैंक की सीमित संख्या बड़ी चुनौतियां हैं।  अगले पांच वर्षों में 1,000 नए कॉर्निया विशेषज्ञ तैयार किए जाएं, 50 से 100 नए नेत्र बैंक स्थापित हों और टेलीमेडिसिन व मोबाइल आई क्लीनिक के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बनाई जाए।

संदेश स्पष्ट है—आंखों की हल्की सी भी परेशानी को नजरअंदाज न करें, समय पर जांच कराएं, आंखों को सुरक्षित रखें और नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित करें, ताकि कोई भी युवा अपनी रोशनी न गंवाए।

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