आदिवासी समाज के लिए लड़ाई लड़ते चैतर वसावा भाजपा की आंख की किरकिरी बन गए थे: इसुदान गढ़वी
आम आदमी पार्टी के डेडियापाड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक चैतर वसावा पर आए कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आदिवासी समाज के लिए संघर्ष करने वाले चैतर वसावा भाजपा की आंख की किरकिरी बन गए हैं और इसी कारण उनके ऊपर बार-बार केस किए जाते हैं, बार-बार उन्हें जेल में डाला जाता है। एक दिन ऐसा होता है कि वन कर्मचारी आदिवासी समाज की जमीन में रात दो बजे खड़ी फसल काट देते हैं। स्थानीय लोग फिर चैतर वसावा के पास जाते हैं। चैतर वसावा वन कर्मचारियों से बातचीत करते हैं और कहते हैं कि आप रात दो बजे इस तरह खड़ी फसल काटते हैं। जंगल भूमि के मामले में जो कानून लागू होता है वह आदिवासी समाज के हित के लिए है, फिर भी खड़ी फसल तुरंत काट दी जाती है, और वह भी रात दो बजे। ऐसा क्या कारण था? चैतर वसावा ने वन कर्मचारियों और आदिवासी समाज के बीच जागरूकता लाई और किसानों की समस्या का समाधान करवाया। समझौते के बाद तय हुआ कि इतनी राशि का भुगतान करना होगा। समझौता होने के बाद भाजपा के कार्यकर्ता वहां पहुंच जाते हैं और चैतर वसावा को बुलाकर धमकाते हैं। भाजपा की ओर से मानो चारों तरफ से दबाव बनाकर, केस करके और सजाएं दिलवाकर उन्हें राजनीतिक रूप से दबाने का प्रयास किया जा रहा है। किसी भी सामान्य व्यक्ति को अपने समाज की आवाज उठानी चाहिए, उसे दबाकर गोदाम में बंद करने का प्रयास उचित नहीं है।
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भाजपा को पता चला तो कर्मचारियों को कहकर डराया-धमकाया गया और पुलिस शिकायत करवाई गई। उस मामले में चैतरभाई वसावा जेल भी जाकर आए और फिर दबाव कम न पड़े इसलिए एक केस चलाकर आज चैतरभाई वसावा को सात साल की सजा सुनाई गई। कितने मामलों में इतनी जल्दी सजा हुई है? जब चैतरभाई वसावा समाज के मुद्दे उठाते हैं तो भाजपा को यह पसंद नहीं आता। क्योंकि वे आदिवासी समाज की आवाज बन रहे हैं। सरकार की ओर से चैतरभाई वसावा को लालच भी दिए गए कि भाजपा में आ जाओ, नहीं तो ऐसा कर देंगे, वैसा कर देंगे। इससे पहले भी कई झूठे मामलों में सजा दिलाने की बातें की गई हैं। चैतरभाई वसावा आदिवासी समाज की आवाज के लिए लड़ने वाले युवा हैं, उन्होंने भाजपा में जाने से इंकार किया है। उन्होंने दो बार जेल जाना पसंद किया, लेकिन आखिरकार भाजपा ने चाल चलकर उन्हें सजा दिलवाई है। यह सजा सात साल की है। स्वाभाविक रूप से चैतरभाई वसावा के विधायक पद पर भी इसका खतरा पैदा हो गया है। लेकिन आदिवासी समाज भाजपा को छोड़ेगा नहीं। अंबाजी से उमरगाम तक रहने वाले आदिवासी लोग भाजपा को माफ नहीं करेंगे। आदिवासी समाज चैतरभाई वसावा पर हुए अत्याचार और अन्याय को लेकर आगे भी मामला लड़ता रहेगा और अंत में न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएगा।