Saturday, April 18, 2026

सकट चौथ 2026: सकट चौथ व्रत कथा और महत्व – संतान की रक्षा के लिए करें ये व्रत

by Neha
सकट चौथ 2026: सकट चौथ व्रत कथा और महत्व – संतान की रक्षा के लिए करें ये व्रत

सकट चौथ 2026 व्रत 6 जनवरी को है। जानें सकट चौथ की पूरी कथा, महत्व और पूजा विधि। संतान की सुरक्षा और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इस व्रत को ऐसे करें।

सकट चौथ 2026: सकट चौथ व्रत इस वर्ष 6 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से संतान की सुरक्षा और समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है। इस व्रत में सकट चौथ की कथा का पाठ करना आवश्यक है, तभी पूजा पूर्ण मानी जाती है।

सकट चौथ व्रत कथा

एक समय की बात है, एक कुम्हार गाँव में रहता था। वह बहुत सुंदर मिट्टी के पात्र बनाता और उन्हें भट्टी में पकाकर कठोर करता था। एक वर्ष भट्टी में पात्र पकाने में समस्या आई। कुम्हार की कई कोशिशों के बावजूद मिट्टी के पात्र सही से नहीं पक रहे थे। कुम्हार ने मदद के लिए राजा से सम्पर्क किया। राजा ने राजपुरोहित से समाधान पूछा। राजपुरोहित ने सुझाव दिया कि प्रत्येक बार भट्टी में पात्र पकाने से पहले एक बालक की बलि दी जाए। राजा ने यह आदेश जारी किया और नगर के सभी परिवार एक-एक करके अपनी संतान देने लगे।

एक वृद्ध स्त्री का एकमात्र पुत्र था। सकट चौथ के दिन उसे भट्टी में प्रवेश करना पड़ा। वृद्धा सकट माता की अटूट भक्त थी। उसने अपने पुत्र को सकट देवी की सुपारी और दूब का बीड़ा देकर सुरक्षा का प्रतीक दिया और भट्टी में प्रवेश करते समय सकट माता की प्रार्थना करने को कहा। भट्टी में अग्नि जलाने के बाद अगले दिन चमत्कार हुआ। वृद्धा का पुत्र सुरक्षित रहा और अन्य सभी बच्चों की भी रक्षा हुई। यह घटना सकट माता की कृपा और शक्ति का प्रतीक मानी गई।

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सकट चौथ का महत्व (सकट चौथ 2026)

सकट चौथ माता की अटूट भक्ति और संतान की रक्षा के लिए मनाया जाता है। इस व्रत में माताएँ सकट माता की पूजा करती हैं और संतान के सुख, स्वास्थ्य और संकटों से सुरक्षा की कामना करती हैं।

कैसे करें सकट चौथ व्रत

  1. उपवास और पूजा – सकट चौथ के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला या अर्ध-निर्जला व्रत रखते हैं।

  2. सकट चौथ की कथा का पाठ – व्रत कथा का पाठ करना अनिवार्य है।

  3. स्नान और पूजा सामग्री – सकट माता की मूर्ति, सुपारी, दूब का बीड़ा, फूल और दीपक का प्रयोग करें।

सकट चौथ व्रत संतान के प्रति माता की कृपा और आशीर्वाद का पर्व है। इस दिन माता से अपनी संतान की रक्षा की प्रार्थना करना शुभ माना जाता है।

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