राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जानिए उनके जीवन, स्वतंत्रता संग्राम, राजनीतिक करियर और राष्ट्रपति कार्यकाल की प्रमुख बातें।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और पुष्पांजलि दी। इस अवसर पर देश के सातवें राष्ट्रपति रहे ज्ञानी ज़ैल सिंह के जीवन और योगदान को याद किया गया।
5 मई, 1916 को पंजाब के फरीदकोट जिले के संधवान गांव में जन्मे ज्ञानी ज़ैल सिंह का जीवन स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र सेवा को समर्पित रहा। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान कई बार जेल भी गए।
also read: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 पर भाजपा का फोकस तेज, अमित शाह…
स्वतंत्रता के बाद उन्होंने पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1972 में वे पंजाब के मुख्यमंत्री बने और 1977 तक इस पद पर कार्यरत रहे। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक सुधारों, भूमि नीतियों और शासन व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। 1980 में उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में गृह मंत्री नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े कई अहम मामलों को संभाला।
President Droupadi Murmu paid floral tributes to Giani Zail Singh, former President of India on his birth anniversary at Rashtrapati Bhavan. pic.twitter.com/t1XMrzw8D7
— President of India (@rashtrapatibhvn) May 5, 2026
इसके बाद वर्ष 1982 में ज्ञानी ज़ैल सिंह भारत के राष्ट्रपति चुने गए और 1987 तक देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रहे। उनके कार्यकाल को संवैधानिक मूल्यों के पालन, लोकतांत्रिक परंपराओं के सम्मान और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता के लिए याद किया जाता है।
ज्ञानी ज़ैल सिंह को उनकी सादगी, सहज स्वभाव और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता के लिए व्यापक सम्मान प्राप्त हुआ। उन्होंने राजनीतिक जीवन में एक प्रेरणादायक छवि स्थापित की।
25 दिसंबर, 1994 को उनका निधन हो गया, लेकिन राष्ट्र निर्माण और सार्वजनिक सेवा में उनके योगदान को आज भी सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद किया जाता है।