Saturday, August 8, 2026

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पहले राष्ट्रपति अंगरक्षक सोल्जरथॉन को दिखाई हरी झंडी, 8 हजार से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा

by Neha
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पहले राष्ट्रपति अंगरक्षक सोल्जरथॉन को दिखाई हरी झंडी, 8 हजार से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पहले राष्ट्रपति अंगरक्षक सोल्जरथॉन को हरी झंडी दिखाई। 8 हजार से अधिक लोगों ने सैनिकों के सम्मान में दौड़ में हिस्सा लिया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन परिसर से पहले राष्ट्रपति अंगरक्षक सोल्जरथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान राष्ट्रपति ने एक विशेष डाक आवरण भी जारी किया, जिसे भारतीय सशस्त्र बलों और राष्ट्रपति अंगरक्षक बल की गौरवशाली विरासत को समर्पित किया गया।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य देश के सैनिकों के साहस, बलिदान और राष्ट्रसेवा के प्रति नागरिकों की कृतज्ञता व्यक्त करना रहा। सोल्जरथॉन में 8 हजार से अधिक नागरिकों, सैनिकों, पूर्व सैनिकों, रक्षा परिवारों, छात्रों, संस्थानों, कॉरपोरेट टीमों और फिटनेस प्रेमियों ने भाग लिया।

कारियप्पा परेड ग्राउंड में हुआ आयोजन

राष्ट्रपति भवन से रवाना होने के बाद सोल्जरथॉन का आयोजन दिल्ली छावनी स्थित कारियप्पा परेड ग्राउंड में किया गया। यहां देशभक्ति और सैनिकों के सम्मान से जुड़ा विशेष माहौल देखने को मिला।

प्रतिभागियों ने सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अलग-अलग दौड़ श्रेणियों में हिस्सा लिया। आयोजन का संदेश था कि नागरिक अपने सैनिकों के साथ खड़े हैं और उनके योगदान को हमेशा याद रखते हैं।

तीन श्रेणियों में आयोजित हुई सोल्जरथॉन

राष्ट्रपति अंगरक्षक सोल्जरथॉन को तीन श्रेणियों में आयोजित किया गया।

परमवीर दौड़: 10 किलोमीटर
महावीर दौड़: 5 किलोमीटर
वीर दौड़: 3 किलोमीटर

इनमें पेशेवर धावकों के साथ पहली बार दौड़ में शामिल होने वाले प्रतिभागियों, छात्रों, परिवारों, पूर्व सैनिकों और वरिष्ठ नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

सैनिकों के सम्मान को समर्पित रहा आयोजन

सोल्जरथॉन का मूल संदेश “सैनिकों के साथ दौड़ें, सैनिकों के लिए दौड़ें” रहा। आयोजन के माध्यम से नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच संबंधों को मजबूत करने तथा सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ाने का प्रयास किया गया।

मिजोरम के राज्यपाल, पूर्व सेना प्रमुख और सोल्जरथॉन के संरक्षक जनरल डॉ. वी.के. सिंह ने कहा कि यह आयोजन केवल एक दौड़ नहीं, बल्कि देश के सैनिकों के प्रति राष्ट्रीय कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

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राष्ट्रपति अंगरक्षक बल की 253 वर्ष पुरानी विरासत

राष्ट्रपति अंगरक्षक बल (PBG) की स्थापना वर्ष 1773 में हुई थी। यह भारतीय सेना की सबसे प्रतिष्ठित और पुरानी रेजिमेंटों में शामिल है। राष्ट्रपति के अंगरक्षक के रूप में अपनी संवैधानिक और औपचारिक जिम्मेदारियों के साथ यह बल अपनी विशिष्ट घुड़सवारी परंपरा के लिए भी जाना जाता है।

PBG के जवान घुड़सवारी के अलावा पैराट्रूपिंग और सैन्य अभियानों से संबंधित विभिन्न प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। रेजिमेंट की पहचान अनुशासन, साहस, कर्तव्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण से जुड़ी हुई है।

कारगिल विजय दिवस के 27 वर्ष पूरे होने का भी स्मरण

पहले राष्ट्रपति अंगरक्षक सोल्जरथॉन में कारगिल विजय दिवस के 27 वर्ष पूरे होने के अवसर को भी याद किया गया। इस दौरान कारगिल युद्ध के वीर जवानों और देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई।

आयोजन के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारतीय सैनिकों के साहस, बलिदान और देशसेवा से परिचित कराने का भी संदेश दिया गया।

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फिटनेस और नशामुक्ति का संदेश

सोल्जरथॉन ने देशभक्ति के साथ फिटनेस को भी बढ़ावा दिया। आयोजन ने फिट इंडिया आंदोलन के संदेश को आगे बढ़ाते हुए युवाओं को नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में युवाओं को खेलों से जुड़ने और नशे से दूर रहने का संदेश भी दिया गया। आयोजकों ने स्वस्थ समाज के निर्माण में फिटनेस और खेलों की भूमिका पर जोर दिया।

घायल सैनिकों के पुनर्वास में मदद करेगी आयोजन की राशि

इस सोल्जरथॉन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य सैनिक कल्याण से जुड़ा रहा। आयोजन से प्राप्त धनराशि सशस्त्र बलों के पैराप्लेजिया पुनर्वास केंद्र को सहयोग देने में इस्तेमाल की जाएगी।

यह केंद्र घायल और जख्मी सैनिकों के उपचार, पुनर्वास और सहायता के लिए कार्य करता है। इसके साथ ही युद्ध में शहीद सैनिकों के आश्रितों के कल्याण और अन्य सैनिक कल्याणकारी योजनाओं में भी सहयोग किया जाएगा।

सैनिकों और PBG के घोड़ों के कल्याण पर भी जोर

सोल्जरथॉन के माध्यम से राष्ट्रपति अंगरक्षक बल के जवानों के कल्याण के साथ-साथ रेजिमेंट के घोड़ों की देखभाल में भी सहायता देने का उद्देश्य रखा गया है। PBG की गौरवशाली घुड़सवारी परंपरा में घोड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

अलग-अलग उम्र के लोगों ने दिखाया उत्साह

सोल्जरथॉन में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी देखने को मिली। आयोजकों के अनुसार, एक छोटी बच्ची ने अपनी मां के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जबकि 94 वर्षीय एक वरिष्ठ नागरिक ने भी उत्साह के साथ दौड़ में भाग लिया। इस भागीदारी ने यह संदेश दिया कि सैनिकों के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना किसी उम्र की मोहताज नहीं है।

घायल सैनिकों के सम्मान में ‘सेना’ पहल

कार्यक्रम में ‘सेना मेड बाय द ब्रेवेस्ट’ पहल भी आकर्षण का केंद्र रही। यह पहल पैराप्लेजिया पुनर्वास केंद्र में उपचार और पुनर्वास प्राप्त कर रहे घायल सैनिकों को सम्मान और सहयोग देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

कार्यक्रम में इस पहल से जुड़े उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए, जिनके माध्यम से घायल सैनिकों के साहस और संघर्ष को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

नागरिकों और सेना के बीच मजबूत हुआ जुड़ाव

पहला राष्ट्रपति अंगरक्षक सोल्जरथॉन देशभक्ति, फिटनेस, सैन्य विरासत और नागरिक-सैन्य संबंधों का अनूठा संगम रहा। राष्ट्रपति भवन से शुरू हुई इस पहल ने कारियप्पा परेड ग्राउंड में हजारों लोगों को सैनिकों के सम्मान के एक साझा उद्देश्य से जोड़ा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सोल्जरथॉन को हरी झंडी दिखाए जाने के साथ ही यह आयोजन भारतीय सैनिकों के प्रति नागरिकों की कृतज्ञता और सम्मान की एक यादगार अभिव्यक्ति बन गया।

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