Saturday, April 18, 2026

पापमोचनी एकादशी 2026: तारीख, पूजा मुहूर्त और पारण समय – जानें पापमोचन का महत्व

by Versha
पापमोचनी एकादशी 2026: तारीख, पूजा मुहूर्त और पारण समय – जानें पापमोचन का महत्व

पापमोचनी एकादशी 2026: जानें 15 मार्च को होने वाली पापमोचनी एकादशी की तारीख, पूजा मुहूर्त, व्रत पारण समय और पूजा विधि। इस एकादशी से पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है।

पापमोचनी एकादशी 2026 का व्रत इस साल 15 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। इसे चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी के रूप में पूजा जाता है। पुराणों के अनुसार, पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति न केवल अपने वर्तमान जन्म के पापों से मुक्ति पाता है बल्कि पिछले सात जन्मों के पाप भी समाप्त हो जाते हैं। इसलिए इसे पापमोचन वाली एकादशी भी कहा जाता है।

पापमोचनी एकादशी 2026 का मुहूर्त

  • एकादशी प्रारंभ: 14 मार्च 2026, सुबह 8:10 बजे

  • एकादशी समाप्त: 15 मार्च 2026, सुबह 9:16 बजे

  • पूजा मुहूर्त: सुबह 8:01 – दोपहर 12:30

पापमोचनी एकादशी व्रत पारण समय

  • पारण तिथि: 16 मार्च 2026

  • पारण समय: सुबह 6:30 बजे से 8:54 बजे तक

  • द्वादशी समाप्ति: सुबह 9:40 बजे

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पापमोचनी एकादशी की कथा

पद्म पुराण के अनुसार, प्राचीन काल में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि कठोर तपस्या कर रहे थे। उस समय स्वर्ग की अप्सरा मंजुघोषा उन्हें मोहित करने आई। उसके सौंदर्य और संगीत के प्रभाव से ऋषि का तप भंग हो गया और वे कई वर्षों तक मोह में पड़े रहे। बाद में उन्होंने अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए पापमोचनी एकादशी का व्रत किया। इसके फलस्वरूप उनके सभी पाप नष्ट हो गए और उन्हें पुनः तपस्या की शक्ति प्राप्त हुई।

पापमोचनी एकादशी पूजा विधि और उपाय

  1. दान करना: तिल, गुड़, जल, अन्न और वस्त्र का दान शुभ माना जाता है।

  2. तुलसी पूजा: तुलसी के पौधे में जल अर्पित करके दीपक जलाना चाहिए, जिससे जीवन की नकारात्मकता दूर होती है।

  3. विष्णु सहस्रनाम पाठ: मन और आत्मा की शुद्धि के लिए इस दिन पाठ करना लाभकारी होता है।

  4. पीपल के पेड़ के नीचे दीपक: सरसों के तेल का दीपक जलाने से पितृ दोष दूर होता है।

  5. भजन और कीर्तन: रात में भगवान विष्णु के भजन, कीर्तन और ध्यान करने से आध्यात्मिक उन्नति और आर्थिक प्रगति के मार्ग खुलते हैं।

महत्व

पापमोचनी एकादशी का व्रत न केवल पापों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और शांति भी लाता है। इस दिन किए गए दान, पूजा और भजन-पाठ का विशेष फल प्राप्त होता है।

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